गुरुग्राम।आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने आइसोलेटेड ऑर्बिटल हिस्टोप्लाज्मोसिस – जो आंख के आस-पास के टिश्यू को प्रभावित करने वाला एक दुर्लभ फंगल इन्फेक्शन है, के एक दुर्लभ मामले की सही जांच करते हुए सफलतापूर्वक इलाज किया। यह मामला ऐसे मरीज का था जिसे कोई पहले से मौजूद इम्यून सिस्टम की कमी (इम्यून डेफिशिएंसी) नहीं थी। यह स्थिति बेहद दुर्लभ है और इससे जुड़ी बहुत कम जानकारी या केस रिपोर्ट उपलब्ध हैं।
यह बेहद दुर्लभ स्थिति लगातार लाल आंख और आंख में बेचैनी के रूप में सामने आई और इलाज का कोई खास असर नहीं देखने को मिला। चूंकि इसके लक्षण कई अन्य आम सूजन और इन्फेक्शन वाली आंखों की बीमारियों जैसे ही थे, इसलिए सही बीमारी का पता लगाना चुनौतीपूर्ण था।
इस मरीज की जांच एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने की, जिसमें डॉ. राधिका सारदा (एसोसिएट कंसल्टेंट, इन्फेक्शियस डिजीज और इंटरनल मेडिसिन), डॉ. सुमित अग्रवाल (रुमेटोलॉजी), डॉ. समीर कौशिक (ऑप्थल्मोलॉजी) और डॉ. नीरज गर्ग (पैथोलॉजी) शामिल थे।
हिस्टोप्लाज्मोसिस, हिस्टोप्लाज्मा कैप्सुलेटम के कारण होने वाला एक फंगल इन्फेक्शन है, जो पक्षियों और चमगादड़ों के मल से दूषित मिट्टी में पाया जाता है। यह बीमारी आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करती है और अक्सर कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में देखी जाती है। मजबूत इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ति में आंख के हिस्से (ऑर्बिट) में इसका अलग से इन्फेक्शन होना बेहद दुर्लभ है।
बीमारी की पहचान होने के बाद, मरीज को इन्फेक्शियस डिजीज टीम की देखरेख में एंटी-फंगल दवाएं दी गईं। चूंकि आंखों में दवाओं के ठीक से न पहुँच पाने के कारण ऑर्बिटल इन्फेक्शन के इलाज के लिए कोई मानक गाइडलाइन नहीं थी, इसलिए इलाज करने वाली टीम ने मरीज के क्लिनिकल रिस्पॉन्स के आधार पर दवा के प्रकार, डोज और इलाज की अवधि तय की। मरीज का इलाज लगभग एक साल तक चला, जिससे लक्षण ठीक हो गए और नजर भी बनी रही।
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में ऑप्थल्मोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ. समीर कौशिक ने कहा, भारत में ऑर्बिटल हिस्टोप्लाज्मोसिस बहुत दुर्लभ है। इस बीमारी के लक्षण ऑर्बिट की अन्य सूजन और इन्फेक्शन वाली बीमारियों जैसे ही होते हैं, जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। यह केस रिपोर्ट बताती है कि अगर पारंपरिक इलाज काम न करे, तो इस बीमारी के होने का शक करना और टिश्यू की जांच (बायोप्सी) करवाना जरूरी है।’
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में इंफेक्शियस डिजीज और इंटरनल मेडिसिन की एसोसिएट कंसल्टेंट, डॉ. राधिका सारदा ने कहा, हिस्टोप्लाज्मोसिस आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है और ऐसे मरीजों में होता है जिनका इम्यून सिस्टम किसी वजह से कमजोर हो गया हो। मजबूत इम्यून सिस्टम वाले मरीज में, सिर्फ ऑर्बिट (आंख के सॉकेट) में होने वाला हिस्टोप्लाज्मोसिस (आइसोलेटेड ऑर्बिटल हिस्टोप्लाज्मोसिस) बहुत कम देखा जाता है। मरीज की नजर को खतरे में डालने वाली समस्याओं से बचने के लिए शुरुआती पहचान जरूरी है। जिन मरीजों पर सामान्य इलाज का असर नहीं होता, उनमें बिना देरी किए बायोप्सी की जानी चाहिए।
अपने अनुभव के बारे में बताते हुए, मरीज ने बार-बार होने वाले लक्षणों और समस्या के इलाज की पिछली नाकाम कोशिशों पर चिंता जताई। उन्हें डर था कि उन्हें आंखों की कोई गंभीर बीमारी, जैसे कैंसर, हो सकती है। मरीज ने कहा, जब बायोप्सी से बीमारी की पहचान हो गई, तो मुझे अपनी बीमारी की असलियत समझ आई। डॉ. ने बताया कि यह सिर्फ एक इन्फेक्शन है और भरोसा दिलाया कि इसका इलाज हो सकता है। पूरी टीम ने मेरी हिम्मत वापस पाने में मदद की।










