गाजियाबाद। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और रेबीज नियंत्रण को लेकर गाजियाबाद नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। नगर निगम अब स्ट्रीट डॉग्स में माइक्रोचिप लगाने का अभियान चला रहा है। इस पहल के साथ गाजियाबाद उत्तर प्रदेश का पहला नगर निगम बन गया है, जहां आवारा कुत्तों की पहचान और निगरानी के लिए माइक्रोचिप लगाने की व्यवस्था शुरू की गई है।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देश पर इस अभियान की शुरुआत विजयनगर जोन के वार्ड संख्या एक और वसुंधरा जोन के वार्ड संख्या 100 से की गई है। अभियान के तहत उन स्ट्रीट डॉग्स में माइक्रोचिप लगाई जा रही है, जिनका पहले ही रेबीज टीकाकरण और बध्याकरण (एनीमल बर्थ कंट्रोल) कराया जा चुका है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, माइक्रोचिप के माध्यम से स्ट्रीट डॉग्स की पहचान, उनके स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और टीकाकरण की जानकारी सुरक्षित रखी जा सकेगी। इससे भविष्य में श्वानों की निगरानी और प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र में करीब 48 हजार स्ट्रीट डॉग्स का सफलतापूर्वक बध्याकरण और रेबीज टीकाकरण किया जा चुका है। अब इन्हीं श्वानों में चरणबद्ध तरीके से माइक्रोचिप लगाने का कार्य शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न आरडब्ल्यूए का भी सहयोग मिल रहा है। नगर निगम वार्डवार अभियान चलाकर अधिक से अधिक श्वानों को माइक्रोचिप से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि गाजियाबाद को रेबीज मुक्त बनाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान की नियमित निगरानी की जाए और इसे प्रभावी तरीके से संचालित किया जाए। अभियान की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आशीष त्रिपाठी को दी गई है। नगर निगम की ओर से निराश्रित श्वानों के लिए आधुनिक शेल्टर होम विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
नगर निगम का कहना है कि माइक्रोचिपिंग से स्ट्रीट डॉग्स के टीकाकरण, बध्याकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी। इससे आवारा कुत्तों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और शहर में रेबीज नियंत्रण की दिशा में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।










