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वरुणावत ट्रीटमेंट की सीबीआई जांच को यूकेडी का धरना, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

वरुणावत ट्रीटमेंट की सीबीआई जांच को यूकेडी का धरना, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

  • 282.53 करोड़ खर्च होने के बाद भी वरुणावत असुरक्षित, यूकेडी ने मांगा हिसाब
  • ट्रीटमेंट में घोटाला नहीं तो श्वेत पत्र जारी करे सरकार: किरन रावत

उत्तरकाशी। वरुणावत पर्वत के ट्रीटमेंट कार्यों में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने शनिवार को मणिकर्णिका घाट स्थित गंगा मंदिर के समीप एक दिवसीय धरना दिया। केंद्रीय महामंत्री एवं अधिवक्ता किरन रावत के नेतृत्व में आयोजित धरने के बाद कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। जिलाधिकारी की व्यस्तता के चलते ज्ञापन नायब तहसीलदार ने प्राप्त किया। यूकेडी ने वरुणावत ट्रीटमेंट के लिए जारी धनराशि के उपयोग, अधूरे निर्माण कार्यों और वर्षों बाद भी पर्वत से पत्थर गिरने की समस्या को लेकर गंभीर सवाल उठाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। यूकेडी की केंद्रीय महामंत्री किरन रावत ने कहा कि वर्ष 2004 में वरुणावत ट्रीटमेंट के लिए केंद्र सरकार की ओर से 282.53 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई थी। इसके अतिरिक्त वर्ष 2007 में 70 करोड़ रुपये और बाद में छह करोड़ रुपये ट्रीटमेंट के लिए दिए गए। इसके बावजूद इतने वर्षों बाद भी वरुणावत पर्वत का ट्रीटमेंट पूरी तरह से नहीं हो पाया है। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए जारी धनराशि का उल्लेख करते हुए कहा कि तांबाखाणी सुरंग, जिला पंचायत परिसर, मोरी-नेटवाड़-सांकरी मोटर मार्ग, जिला निर्वाचन कार्यालय एवं एनआईसी भवन, उद्यान विभाग की कॉलोनी, मोरी के कल्प गांव के लिए ढोला में झूला पुल और नगर पालिका के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सहित अन्य कार्यों पर खर्च की गई धनराशि का विस्तृत हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्य पूरे नहीं होने की स्थिति में 5.01 करोड़ रुपये की धनराशि वापस किए जाने का विषय भी जांच के दायरे में आना चाहिए।

किरन रावत ने तांबाखाणी सुरंग की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सुरंग के भीतर लगातार पानी का रिसाव हो रहा है और बिजली की व्यवस्था नहीं होने से दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रीटमेंट के नाम पर जारी धनराशि का समुचित उपयोग नहीं हुआ, जिसके कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने बड़थी-टेखला वैकल्पिक राजमार्ग के निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके लिए 52 करोड़ रुपये की धनराशि आने के बावजूद कार्य आज तक अधूरा है। उन्होंने तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की। यूकेडी के भटवाड़ी ब्लॉक अध्यक्ष एवं युवा नेता अतुल चौहान ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उपलब्ध दस्तावेजों और धनराशि के लेन-देन का विस्तृत परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रीटमेंट पर अरबों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बावजूद आज भी वरुणावत पर्वत से पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। पर्वत की तलहटी में बसे लोगों को बरसात के मौसम में भय के बीच रात गुजारनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रीटमेंट कार्यों में भ्रष्टाचार नहीं हुआ है तो सरकार को श्वेत पत्र जारी कर धनराशि के आवंटन, खर्च और कार्यों की वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण जनता के सामने रखना चाहिए। जिला कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक श्याम सिंह चौहान ने कहा कि भ्रष्टाचार का खामियाजा अंततः आम जनता को भुगतना पड़ता है। ट्रीटमेंट के नाम पर खर्च होने वाली धनराशि जनता की है, इसलिए उसके उपयोग का हिसाब देना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वरुणावत ट्रीटमेंट से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके। ज्ञापन के माध्यम से यूकेडी ने राष्ट्रपति से वरुणावत ट्रीटमेंट प्रकरण की तत्काल सीबीआई जांच कराने, धनराशि के उपयोग और अधूरे कार्यों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। दल ने स्पष्ट किया कि यदि ट्रीटमेंट कार्यों में कोई घोटाला नहीं हुआ है तो सरकार श्वेत पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करे। धरना-प्रदर्शन में सैनिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष जगमोहन सिंह पश्चिम, जिला महामंत्री पंकज उनियाल, जिला प्रचार सचिव अविनाश नौटियाल, सरिता गंगानी, लक्ष्मी चौहान, कुसुमलता अवस्थी, संगीता चौहान, मोहित मथुरा, मनोज राणा, सतबीर रमोला, अनुज, मोहित, आनंद बिष्ट, मनदीप राणा सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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