‘तुझे याद ना मेरी आई’ की कहानी सुनकर भर आएंगी आंखें! पहले DDLJ के लिए बना था गाना, फिर ‘कुछ कुछ होता है’ ने दी अमर पहचान

कुछ गाने सिर्फ कानों तक नहीं पहुंचते, बल्कि सीधे दिल में उतर जाते हैं। उनके बोल किसी पुराने रिश्ते की याद दिलाते हैं, तो धुन किसी अधूरी मोहब्बत का दर्द फिर से जगा देती है। ऐसा ही एक सदाबहार गीत है ‘तुझे याद ना मेरी आई’। साल 1998 में आई फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के इस गाने ने जुदाई और टूटे दिल की भावनाओं को ऐसी आवाज दी कि आज भी इसे सुनकर कई लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। लेकिन इस गाने की कहानी फिल्म की रिलीज से भी पहले शुरू हो चुकी थी। दिलचस्प बात यह है कि इसे पहले शाहरुख खान की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के लिए रिकॉर्ड किया गया था, मगर वहां इस्तेमाल नहीं हो सका।
राहुल-अंजलि की कहानी और गाने का दर्द
16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई ‘कुछ कुछ होता है’ करण जौहर की पहली निर्देशित फिल्म थी। इसमें शाहरुख खान राहुल, काजोल अंजलि और रानी मुखर्जी टीना के किरदार में नजर आई थीं। फिल्म की कहानी दोस्ती, एकतरफा प्यार, बिछड़ने और समय के साथ रिश्तों के बदलने के इर्द-गिर्द घूमती है।
करीब 10 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में लगभग 106 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला। फिल्म के संगीत ने भी इसकी लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई, खासकर ‘तुझे याद ना मेरी आई’ ने जुदाई के एहसास को यादगार बना दिया।
पंजाबी बोलों में थी गाने की पहली कहानी
इस गीत की शुरुआत एक पंजाबी धुन से हुई थी। संगीतकार जतिन-ललित की जोड़ी के ललित पंडित ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बहन और गायिका सुलक्षणा पंडित इस गीत को पंजाबी बोलों में गाया करती थीं। इसके मूल बोल थे, ‘तैनू याद ना साडी आई, तैनू खत की लिखना…’।
इन पंक्तियों में किसी अपने के दूर चले जाने और उसकी याद में तड़पने का दर्द छिपा था। जब गीतकार आनंद बख्शी ने इसका पंजाबी रूप सुना, तो वह भावुक होकर रो पड़े थे। इस प्रतिक्रिया से अंदाजा लगाया जा सकता है कि धुन में जुदाई का एहसास कितना गहरा था।
DDLJ में क्यों नहीं इस्तेमाल हुआ गाना?
ललित पंडित के एक इंटरव्यू के मुताबिक, इस गीत का शुरुआती रूप शाहरुख खान की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के लिए रिकॉर्ड किया गया था। फिल्म 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज हुई थी। हालांकि, कहानी में ऐसा उपयुक्त दृश्य नहीं बन पाया, जहां इस गाने को शामिल किया जा सके। इसी वजह से गीत फिल्म में इस्तेमाल नहीं हुआ।
कुछ समय बाद करण जौहर ‘कुछ कुछ होता है’ पर काम कर रहे थे। उन्हें फिल्म के एक भावुक हिस्से के लिए ऐसी धुन की तलाश थी, जो बिछड़ने और अधूरे प्यार की पीड़ा को बयां कर सके।
पामेला चोपड़ा ने दिखाई सही राह
यहीं इस गाने की कहानी में पामेला चोपड़ा की एंट्री हुई। उन्होंने करण जौहर को जतिन-ललित की उस पंजाबी धुन को सुनने की सलाह दी। करण को धुन पसंद आई और इसे फिल्म की कहानी के अनुरूप नए हिंदी बोलों के साथ तैयार किया गया। आनंद बख्शी के शब्दों ने धुन को नया रूप दिया और ‘तुझे याद ना मेरी आई’ दर्शकों तक पहुंचा।
गाने की शुरुआत लोकगीत गायिका मनप्रीत अख्तर की आवाज में सुनाई देने वाली पंक्तियों ‘हो मेरे रब्बा इश्क किसी को ऐसे ना तड़पाए…’ से होती है। इसके बाद अलका याग्निक की आवाज गीत के दर्द को आगे बढ़ाती है।
एक ऐसी धुन, जो पहले एक फिल्म के लिए बनी, लेकिन वहां जगह नहीं पा सकी, आखिरकार ‘कुछ कुछ होता है’ की सबसे यादगार भावनात्मक प्रस्तुतियों में शामिल हो गई। यही इस गाने की खासियत है—इसकी कहानी भी उतनी ही भावुक है, जितना इसका संगीत।



