प्रदेश अध्यक्ष से नहीं हुई मुलाकात , भाजपा कार्यालय से लौटे कई नेता
अमित शाह के दौरे से पहले लखनऊ में बढ़ी राजनीतिक हलचल, कार्यालय पहुंचे सुभासपा के कई नेता भी

रघुबीर शर्मा । लखनऊ
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी दो दिवसीय लखनऊ दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में राजनीतिक हलचल और गहमागहमी काफी बढ़ गई है। मंगलवार को सुबह 11 बजे से ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए दर्जनों पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकतार्ओं का आना-जाना लगा रहा। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के शहर से बाहर रहने के कारण कई प्रमुख नेताओं को मुलाकात किए बिना ही निराश होकर वापस लौटना पड़ा।भाजपा कार्यालय परिसर में उस समय राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं, जब दोपहर करीब 1:30 बजे सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। हालांकि दोनों दलों के नेताओं की ओर से इसे औपचारिक मुलाकात बताया गया, लेकिन आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताते चले कि, आगामी 30 अक्टूबर को डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश भर से 548 से अधिक सदस्यों और 30 स्थायी आमंत्रित सदस्यों के शामिल होने की संभावना है।यह बैठक उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन की बूथ स्तरीय पकड़ को मजबूत करने के लिए बुलाई गई है। अमित शाह के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक और राज्य मंत्रिमंडल के कई मंत्री इस उच्चस्तरीय बैठक में मौजूद रहेंगे।
कोर कमेटी की बैठक में होगा कामकाज का आकलन
प्रदेश कार्यसमिति के तुरंत बाद भाजपा कोर कमेटी की एक विशेष समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में प्रदेश के 6 संगठनात्मक क्षेत्रों (पश्चिम, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, काशी और गोरखपुर) से प्राप्त हुए लगभग 1,00,000 से अधिक बूथों के फीडबैक और ग्राउंड रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए के सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बैठाना और जमीनी स्तर पर कार्यकतार्ओं का मनोबल बढ़ाना इस दौरे का मुख्य एजेंडा है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यालय पर नेताओं की इस अनौपचारिक भागदौड़ और सहयोगी दलों की सक्रियता से साफ है कि भाजपा ने आगामी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।



