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‘हुंकार: द रोअर’ पर निर्देशक करण डी कपाड़िया: न्याय के लिए आवाज उठाने की कहानी है यह सीरीज

‘हुंकार: द रोअर’ पर निर्देशक करण डी कपाड़िया: न्याय के लिए आवाज उठाने की कहानी है यह सीरीज

निर्देशक करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा की आगामी सीरीज ‘हुंकार: द रोअर’ ऐसी कहानी है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का इरादा रखती है। इस सीरीज को एक शानदार विजुअल अनुभव में ढालने से पहले इसकी टीम ने करीब एक साल तक राइटर्स रूम में कहानी पर काम किया, ताकि इसे धारदार और प्रभावशाली बनाया जा सके। इतना ही नहीं, सही नाम तलाशने के लिए मेकर्स ने कई नामों पर विचार किया और आखिरकार ‘हुंकार’ नाम सामने आया।

करण डी कपाड़िया कहते हैं, “यह नाम मेरे सामने अचानक बिजली की तरह आया। ऐसा लगा जैसे इस नाम ने मेरे चेहरे पर थप्पड़ मार दिया हो।” उन्होंने बताया कि सीरीज में बढ़ते डर और मनोवैज्ञानिक तनाव का माहौल बनाने के लिए उन्होंने मशहूर निर्देशक डेविड फिंचर की फिल्मों जैसी टोन से प्रेरणा ली।

कोरोना के बाद शुरू हुआ सीरीज पर काम

‘हुंकार’ के बनने की शुरुआत के बारे में करण ने बताया कि यह प्रोजेक्ट ‘बिग गर्ल्स डोंट क्राई’ के साथ-साथ विकसित हो रहा था। उन्होंने कहा, “यह वास्तव में ‘बिग गर्ल्स डोंट क्राई’ के साथ समानांतर रूप से हुआ। नित्या और मैंने इस विषय से जुड़ा एक आर्टिकल पढ़ा था और हमें लगा कि यह ऐसी कहानी है जिसे बताया जाना जरूरी है।”

उन्होंने बताया कि कोविड के बाद उन्होंने ‘बिग गर्ल्स’ के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट को विकसित करना शुरू किया। शुरुआत में योजना थी कि ‘बिग गर्ल्स डोंट क्राई’ के तुरंत बाद इसकी शूटिंग की जाएगी और आखिरकार ऐसा ही हुआ।

करीब एक साल तक चली कहानी लिखने की प्रक्रिया

करण ने बताया कि कहानी को मनचाहे मुकाम तक पहुंचाने में करीब एक साल लगा। उन्होंने पहले पूरी कहानी लिखी और फिर राइटर्स के साथ मिलकर उसे बीट शीट में बदला। इसके बाद हर लेखक ने अपने-अपने एपिसोड के ड्राफ्ट पर काम किया।

करण के मुताबिक, ड्राफ्ट वापस आने के बाद उन्होंने उसमें दोबारा बदलाव किए और यह प्रक्रिया कई बार दोहराई गई। उनका लक्ष्य कहानी के सही टोन और मानसिकता को हासिल करना था।

धर्म से जुड़े विवाद से दूर रखना चाहते थे कहानी

करण ने बताया कि कहानी लिखते समय उनकी कुछ बातें बिल्कुल स्पष्ट थीं। वे इसे धर्म या किसी अन्य विवाद से जोड़ना नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि वह कहानी को भारत की एक गंभीर समस्या यानी बलात्कार की महामारी के करीब रखना चाहते थे।

उनके मुताबिक, समाज को इस समस्या का मिलकर सामना करने की जरूरत है। उन्होंने इसे देश की उन महिलाओं को सलाम बताया जो न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं।करण कहते हैं, “मैं नहीं चाहता था कि हम असली मुद्दे से भटक जाएं। यह डेविड बनाम गोलियथ की कहानी है—अपने सच के लिए आवाज उठाने की, चाहे उसके कितने भी गंभीर परिणाम क्यों न हों।”

डर और मनोवैज्ञानिक तनाव को कहानी का हिस्सा बनाया

‘हुंकार’ की मनोवैज्ञानिक टोन के बारे में करण ने बताया कि सीरीज में डर और बेचैनी का माहौल लगातार बना रहेगा। उनका प्रयास था कि दर्शक मुख्य किरदार की मानसिक स्थिति को महसूस कर सकें।उन्होंने डेविड फिंचर का उदाहरण देते हुए कहा कि वह अपने काम में इस तरह के माहौल को बहुत प्रभावी ढंग से पेश करते हैं। करण चाहते थे कि ‘हुंकार’ में भी किरदारों के भीतर पैरानोइया, डर और न्याय पाने की बेचैनी दिखाई दे।कहानी में किरदारों को यह डर भी रहता है कि न्याय की तलाश करते-करते कहीं उन्हें रास्ते से हटा न दिया जाए या उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबा न दिया जाए।

सेट से लेकर रोशनी तक हर चीज में दिखेगा डर

करण ने बताया कि सीरीज के सेट डिजाइन, लाइटिंग, स्टेजिंग और कलाकारों के अभिनय तक में एक अजीब-सी बेचैनी और डर का माहौल बनाए रखने की कोशिश की गई है।उनके मुताबिक, टोन को किरदारों की मानसिक यात्रा और उनके ट्रॉमा को दिखाना था। उन्होंने कहा कि भारत में पीड़ितों के अंदर चलने वाले मानसिक संघर्ष के बारे में ज्यादा बात नहीं होती।उन्होंने बताया कि किसी यौन अपराध के बाद पीड़ित को एक ही घटना को बार-बार दोहराना पड़ता है—वकील, जज, जांच अधिकारी और मेडिकल रिपोर्ट जैसी प्रक्रियाओं के दौरान। इससे जुड़ा डर और ट्रॉमा लंबे समय तक बना रहता है।करण के अनुसार, सीरीज में इसी मानसिक प्रभाव को समझने और दिखाने की कोशिश की गई है कि बिना सहमति किसी व्यक्ति के साथ ऐसा अपराध उसके मन और जीवन पर कितना गहरा असर डाल सकता है।

कहानी में है ‘अंडरडॉग’ की लड़ाई

करण ने ‘हुंकार’ को एक अंडरडॉग कहानी भी बताया। इसमें एक बेरोजगार वकील, पहली बार जिम्मेदारी संभाल रहा पुलिस अधिकारी और 17 साल की एक लड़की है, जिसका परिवार ऐसे दुश्मन का सामना करने की स्थिति में नहीं है जिसके पास लगभग राज्य जैसी ताकत है।हालांकि करण के मुताबिक कहानी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश मानवीय जज्बे की जीत है।उन्होंने कहा, “हालात चाहे कितने भी हमारे खिलाफ क्यों न हों, उम्मीद हमेशा रहती है और हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। यही हमारे शो का सबसे बड़ा संदेश है।”

अनीत पड्डा को लेकर पहले से थे स्पष्ट

करण ने बताया कि अनीत पड्डा को कास्ट करने को लेकर वह पहले से ही स्पष्ट थे। उन्होंने अनीत के साथ ‘बिग गर्ल्स डोंट क्राई’ और इससे पहले एक शॉर्ट फिल्म में काम किया था।उन्होंने बताया कि नित्या मेहरा द्वारा निर्देशित शॉर्ट फिल्म ‘खट्टी मीठी यादें’ में अनीत के साथ उनका शुरुआती काम हुआ था। यह फिल्म प्लेटफॉर्म Waves पर रिलीज हुई थी।करण ने अनीत को एक “ऑर्गेनिक” और “मेथड-ओरिएंटेड” एक्टर बताया। उनके मुताबिक, अनीत शूटिंग से काफी पहले ही अपने किरदार की मानसिक स्थिति में खुद को ढाल लेती हैं।उन्होंने कहा कि किसी महत्वपूर्ण गवाही वाले सीन की शूटिंग के दौरान अनीत चुपचाप बैठकर किरदार की सोच और भावनाओं को महसूस करती थीं। करण ने उनके अभिनय, टाइमिंग, डायलॉग डिलीवरी और खासकर आंखों से भाव व्यक्त करने की क्षमता की तारीफ की।

फातिमा सना शेख ने भी की खास तैयारी

करण ने फातिमा सना शेख के अभिनय की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि फातिमा ने अपने किरदार में पूरी तरह उतरने के लिए कई जांच अधिकारियों से मुलाकात की और पुलिसकर्मियों तथा उनके परिवारों के साथ समय बिताया।इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों के काम करने के तरीके और उनकी पेशेवर चुनौतियों को समझने की कोशिश की। करण के मुताबिक, पूरी कास्ट ने अपने-अपने किरदारों के लिए इसी तरह की गंभीर तैयारी की।

25 सितंबर से JioHotstar पर स्ट्रीम होगी सीरीज

कोर्टरूम ड्रामा ‘हुंकार: द रोअर’ का निर्माण बिरला स्टूडियोज और अप्लॉज एंटरटेनमेंट ने प्रियंका चोपड़ा के प्रोडक्शन हाउस पर्पल पेबल पिक्चर्स और मंगाटा फिल्म्स प्रोडक्शन के साथ मिलकर किया है।सीरीज का निर्देशन करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा ने किया है। ‘हुंकार: द रोअर’ 25 सितंबर से JioHotstar पर स्ट्रीम होने के लिए निर्धारित है।

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