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अजय देवगन और अभिषेक पाठक की ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ बनी बॉक्स ऑफिस इवेंट

अजय देवगन और अभिषेक पाठक की ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ बनी बॉक्स ऑफिस इवेंट

एक थ्रिलर का मकसद दर्शकों को लगातार सोचने और अनुमान लगाने पर मजबूर करना होता है। लेकिन ‘दृश्यम’ ने इससे भी मुश्किल काम किया है। इस फ्रैंचाइजी ने दर्शकों को सिर्फ कहानी सुलझाने की कोशिश में नहीं लगाया, बल्कि उन्हें इस पूरी पहेली से भावनात्मक रूप से भी जोड़ दिया।

आज जब ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, तो इस फ्रैंचाइजी से जुड़े आंकड़े खुद इसकी कहानी बयां कर रहे हैं। एडवांस बुकिंग शुरुआती दौर में ही 18 करोड़ रुपये ग्रॉस का आंकड़ा पार कर चुकी थी, जबकि बुधवार सुबह तक नेशनल चेन में ही 1.25 लाख से ज्यादा टिकट बिक चुके थे। ट्रेड ट्रैकिंग के मुताबिक, फिल्म इस साल की सबसे बड़ी हिंदी फिल्मों की ओपनिंग में शामिल होने की ओर बढ़ रही है।

एक फैमिली सस्पेंस थ्रिलर के लिए ये आंकड़े इसलिए खास हैं क्योंकि ‘दृश्यम’ को कभी भी किसी बड़े स्पेक्टेकल या विजुअल इवेंट फिल्म की तरह पेश नहीं किया गया। इसमें न सुपरहीरो हैं, न बड़े पैमाने के एक्शन सीक्वेंस और न ही कोई काल्पनिक दुनिया। इसकी असली ताकत हमेशा एक मिडिल क्लास परिवार, एक भयानक राज और उस परिवार को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाले एक शख्स की कहानी रही है।

कहानी के सफर में विजय सलगांवकर सिर्फ एक किरदार नहीं रहे, बल्कि खुद एक चर्चा का विषय बन गए। पहली ‘दृश्यम’ में दर्शकों ने विजय की उस क्षमता को देखा, जिसके जरिए वह लगभग नामुमकिन लगने वाले एक मजबूत अलिबाई को तैयार करता है। इसके बाद ‘दृश्यम 2’ ने इस उत्सुकता को और आगे बढ़ाया और विजय के बनाए पूरे कवर-अप को फिल्म की सबसे बड़ी थिएट्रिकल चर्चाओं में शामिल कर दिया।

तीसरी फिल्म तक पहुंचते-पहुंचते दर्शक सिर्फ विजय की कहानी नहीं देख रहे थे, बल्कि उसके साथ मिलकर इस पहेली को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे।

यही इस फ्रैंचाइजी की असामान्य विरासत है। फैंस ने वर्षों तक फिल्म के सीन, तारीखों, डायलॉग और छोटी-छोटी डिटेल्स को खंगाला और यह थ्योरी बनाते रहे कि विजय आगे क्या कर सकता है। फिल्ममेकर्स ने भी माना है कि दर्शक कहानी से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। निर्देशक अभिषेक पाठक ने बताया है कि नई स्क्रीनप्ले तैयार करते समय उन्होंने फैंस की थ्योरी पढ़ीं और जानबूझकर उन विचारों से दूरी बनाई, जिन्हें दर्शक पहले ही भांप चुके थे।

तीसरे अध्याय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी ऐसे दर्शकों को कैसे चौंकाया जाए, जो वर्षों से फिल्म से एक कदम आगे रहने की कोशिश कर रहे हैं?

अभिषेक पाठक ने इसका जवाब एक नई हिंदी कहानी के जरिए दिया है। फिल्म मलयालम ‘Drishyam 3’ की कहानी को फॉलो करने के बजाय एक नई कहानी लेकर आई है। इस बार विजय के सामने एक नया संघर्ष है। फिल्म में जयदीप अहलावत SP क्राइम ब्रांच अधिकारी राजवीर सिंह तोमर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जबकि प्रकाश राज भी जांच का हिस्सा बने हैं।फिल्म के ट्रेलर ने संकेत दिया था कि कहानी विजय की बेहद सावधानी से बनाई गई दुनिया और उसे आखिरकार तोड़ने की कोशिश कर रही ताकतों के बीच टकराव पर आधारित है।

यही वजह है कि ‘द कन्क्लूजन’ की रिलीज को सिर्फ किसी फ्रैंचाइजी फिल्म की ओपनिंग के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इसके आसपास एक खास तरह का माहौल और उत्सुकता है शायद आखिरी बार।2 अक्टूबर की रिलीज डेट भी अब ‘दृश्यम’ की कहानी का हिस्सा बन चुकी है। फ्रैंचाइजी के फैंस लंबे समय से इस तारीख को लेकर तरह-तरह के मजाक और अंदरूनी संदर्भ बनाते रहे हैं। इस साल यही तारीख आखिरकार उस कहानी को उसके घोषित निष्कर्ष तक पहुंचा रही है।

अभिषेक पाठक के लिए उपलब्धि सिर्फ एक और ‘दृश्यम’ फिल्म बनाना नहीं है। उपलब्धि यह भी है कि यह फ्रैंचाइजी उस मुकाम तक पहुंच चुकी है, जहां एक सस्पेंस थ्रिलर किसी बड़े इवेंट फिल्म की तरह एडवांस बुकिंग और थिएट्रिकल उत्साह पैदा कर रही है।और शायद यही असली दृश्यम फिनॉमिना’ है दर्शक सिर्फ यह जानने सिनेमाघर नहीं आ रहे कि आखिर हुआ क्या। वे पिछले कई सालों से खुद इस सवाल के जवाब तलाशते और अपनी-अपनी थ्योरी बनाते रहे हैं।

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