सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर

- हेतमापुर में कटान से तबाही अब तक 22 घर कटान की भेंट चढ़े। दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से घिरे
सूरतगंज,बाराबंकी। सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 58 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है।पानी बढ़ने के साथ ही हेतमापुर में नदी की कटान जमकर तबाही मचा रही है।नदी की तेज धारा लगातार घरों और जमीन को निगल रही है।कटान से अब तक 22 मकान नदी में समा चुके है। जबकि गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
रामनगर तहसील के हेतमापुर में सरयू नदी का कटान लगातार विकराल होता जा रहा है। सोमवार को भी नदी ने रहमत, अहमद, सलीम, मुन्ना, अमीन, इब्राहिम, किस्मत अली, सतीश, तालिब, बकरिदी, शोभराम, इरफान, इमरान के मकानों को अपनी आगोश में ले लिया। इसके अलावा पशु अस्पताल का एक भवन भी नदी में समा गया। नदी के तेज कटान से सैकड़ों वर्ष पुरानी मस्जिद का नामोनिशान मिटने के बाद अब उससे सटी संत गुरु नारायण दास की तपोस्थली, अय्यूब, सुहेल, रियाज, राजाराम, अहमद, कलाम, जुम्मन, मंशाराम, तुलसीराम, बाबा दीन,तेज नारायण के भी मकान कटान की जद में आ गए है।
नदी सुप्रसिद्ध बाबा नारायण दास की तपोस्थली की दीवार से सटकर लगातार कटान कर रही है। मंदिर को बचाने के लिए बाढ़ खंड विभाग पूरी ताकत झोंक रहा है। विभाग की ओर से बोल्डर -पत्थर और ईंटों से भरी बोरियां डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि अभी तक मंदिर की दीवार और परिसर को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है।उधर बाबा पुरवा में कटान के खौफ से लोग अपना समान समेत कर सुरक्षित स्थान पर जा रहे है नदी के दूसरे छोड़ पर स्थित पूरनपुर में नदी की कटान जारी है।
- बचाव कार्य ठप होने से बढ़ी परेशानी
हेतमापुर में सरयू के कटान से हाल ही में दूरसंचार भवन, हनुमान मंदिर समेत 33 मकान नदी में समा गए थे। नदी जब बाबा नारायण दास की तपोस्थली के करीब पहुंची तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर बाढ़ खंड ने बोल्डर-पत्थर और ईंटों से भरी बोरियां डालकर बचाव कार्य किया था। इससे कटान धीमा हुआ, लेकिन जलस्तर कम होते ही काम बंद कर दिया गया। अब जलस्तर बढ़ने पर नदी फिर मंदिर की दीवार से सटकर कटान कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बचाव कार्य जारी रहता तो हालात इतने गंभीर नहीं होते।
- पूरब से पश्चिम तक तबाही
हेतमापुर में सरयू नदी भयावह रूप में बह रही है। पूरब में नदी खेतों को काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है, जबकि पश्चिम में आबादी को काटकर मंदिर के करीब पहुंच गई है। चारों तरफ कटान से हाहाकार मचा हुआ है। नदी के बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीण अपने आशियाने तोड़कर सामान और मलबा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।
- पहली बार बाढ़ शरणालय में पहुंचे पीड़ित
- दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में
गृहस्थी का सामान लेकर तटबंध पर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा हेतमापुर, बेलहरी, बाबा पुरवा, बलईपुर, ललपुरवा, कोढ़री, मदरहा, कोयली पुरवा, सकतापुर, गायघाट, चौधरी पुरवा, बबुरी, पर्वतपुर, तकिया, जमका, खुज्जी, फाजिलपुर और पूरनपुर समेत दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं।इन गांवों के जाने के लिए केवल नाव ही सहारा है।
"हेतमापुर में सरयू नदी की कटान से दूसरे दिन 12 घर प्रभावित हुए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से कुछ गांवों में पानी पहुंचा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों के लोगों को आवश्यक राहत सामग्री के साथ लंच पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विपुल सिंह, तहसीलदार रामनगर





