फोनपे ने अपने स्टॉक ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म को 'फोनपे इन्वेस्ट' में अपग्रेड किया
शेयर.मार्किट अब फोनपे इन्वेस्ट हो गया है। इस बदलाव के साथ ही पेमेंट्स, लोन और इंश्योरेंस की तरह बेहतरीन रिसर्च-आधारित इन्वेस्टिंग सर्विस भी अब फोनपे के एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।

फोनपे ने अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म 'शेयर.मार्किट' का नाम बदलकर 'फोनपे इन्वेस्ट' कर दिया है, ताकि यूज़र्स को एक ही भरोसेमंद ब्रांड नेम के साथ निवेश का एक बेहतर अनुभव मिल सके।शेयर.मार्किट अब फोनपे इन्वेस्ट हो गया है। इस बदलाव के साथ ही पेमेंट्स, लोन और इंश्योरेंस की तरह बेहतरीन रिसर्च-आधारित इन्वेस्टिंग सर्विस भी अब फोनपे के एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इसके ज़रिए निवेश अब फोनपे के करोड़ों यूज़र्स के लिए और भी आसान हो जाएगा, जिससे वेल्थ सर्विसेज एक बड़े वर्ग तक पहुँच सकेंगी।इस नए बदलाव के तहत, फोनपे इन्वेस्ट अपने स्टॉक्स, आईपीओ, म्यूचुअल फंड्स और एफएण्डओ ऑफ़रिंग्स को हाल ही में लॉन्च हुए नए पोर्टफोलियो ऑप्टिमाइज़र के साथ जोड़ता है, जो एक ऑल-इन-वन पोर्टफोलियो इंटेलिजेंस टूल है।
इसके ज़रिए यूज़र्स एक ही प्लेटफॉर्म पर अपना पोर्टफोलियो बनाने, रिव्यू करने और ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं।एक्टिव निवेशकों के लिए 'पोर्टफोलियो ऑप्टिमाइज़र' खास फोनपे इन्वेस्ट ऐप के ज़रिए उपलब्ध होगा, जबकि आम यूज़र्स के लिए मुख्य फोनपे ऐप में आसान एंट्री पॉइंट्स और गाइडेड इन्वेस्टमेंट जर्नी भी शामिल की जाएंगी।इस मौके पर फोनपे के फाउंडर और सीपीटीओ राहुल चारी ने कहा, "फोनपे इन्वेस्ट का लॉन्च हमारी वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं को एक नए और बेहतर स्तर पर ले जाने वाला बड़ा कदम है। जैसे हम फोनपे की पहचान के साथ वेल्थ और ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म को एक साथ ला रहे हैं, फोनपे इन्वेस्ट ब्रांड सभी भारतीयों के लिए स्मार्ट इन्वेस्टिंग को सबके लिए आसान बनाने के हमारे मकसद को दिखाता है, ठीक वैसे ही जैसे हमने भारत के पेमेंट इकोसिस्टम को सबके लिए आसान बनाया है।
हम ऐसे स्मार्ट प्रोडक्ट्स और टूल्स एक साथ ला रहे हैं, जिनकी मदद से निवेशक अपने पोर्टफोलियो बना सकेंगे, उनकी रिव्यु कर सकेंगे और उन्हें बेहतर बना सकेंगे। शेयर.मार्किट के मौजूदा यूज़र्स की डीमैट होल्डिंग्स, बैलेंस, वॉचलिस्ट, पुराने ऑर्डर (ऑर्डर हिस्ट्री) और लॉगिन क्रेडेंशियल्स नई पहचान के साथ सुरक्षित रहेंगे, और वे ज़्यादा इन्वेस्टिंग फ़ीचर्स के साथ आसानी से ट्रेडिंग जारी रख सकेंगे। इस बदलाव के साथ मौजूदा ब्रोकरेज स्ट्रक्चर, फ़ीस प्लान या सालाना मेंटेनेंस चार्ज (AMC) में कोई बदलाव नहीं होगा।



