- 38वें शारदोत्सव में 6 दिन तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन
- देवी चौधरानी यात्रा पाला और बंगाल की कलाकार अर्पिता दास रहेंगी आकर्षण
कविता। फरीदाबाद
सेक्टर-16 स्थित फरीदाबाद कालीबाड़ी मंदिर में 16 से 21 अक्टूबर तक 38वां शारदोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। छह दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ बंगाल की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं की मनमोहक झलक देखने को मिलेगी। मंदिर परिसर में भव्य पूजा पंडाल, पारंपरिक सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी की तैयारियां की गई हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पुष्पांजलि, भोग-लंगर, संध्या आरती, धुनुचि नृत्य और ढाकी वादन महोत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे।
फरीदाबाद कालीबाड़ी के महासचिव ए.के. पंडित ने बताया कि दुर्गा पूजा की सभी धार्मिक विधियां बंगाली पंचांग और परंपराओं के अनुसार संपन्न कराई जाएंगी। मां दुर्गा की प्रतिमा पश्चिम बंगाल से आए प्रसिद्ध मूर्तिकार पंचू गोपाल पाल और प्रदुत पाल तैयार कर रहे हैं। वहीं, पूजा पंडाल की रचनात्मक संकल्पना और सजावट की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर के कलाकार दीपक कुमार घोष संभाल रहे हैं।
देवी चौधरानी का होगा विशेष मंचन
महोत्सव में महाषष्ठी के अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना पर आधारित देवी चौधरानी यात्रा पाला का विशेष मंचन किया जाएगा। अभिजीत गांगुली और जी.सी. मुखर्जी ने इसकी जानकारी दी। महाअष्टमी पर बंगाल की कलाकार अर्पिता दास विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगी। दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष सुप्रकाश अधिकारी के अनुसार, आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
16 को आनंद मेला
महोत्सव की शुरुआत 16 अक्टूबर को महाषष्ठी पूजा और मां दुर्गा की प्रतिमा के उद्घाटन के साथ होगी। इसी दिन महिलाओं की ओर से आनंद मेले का आयोजन भी किया जाएगा। 17 अक्टूबर को महासप्तमी, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी, 19 अक्टूबर को संधि पूजा और 20 अक्टूबर को महानवमी के अनुष्ठान होंगे। 21 अक्टूबर को दशमी पूजा और राजेश्वरी माता रानी की पूजा के साथ धार्मिक आयोजनों का समापन होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन पुष्पांजलि, भोग वितरण और संध्या आरती भी आयोजित की जाएगी।
सामाजिक एकता का संदेश
कालीबाड़ी के अध्यक्ष डॉ. प्राणजित भौमिक ने बताया कि महोत्सव में शहर के विभिन्न समुदायों की भागीदारी रहेगी। महिलाओं की सक्रिय सहभागिता भी आयोजन की विशेष पहचान होगी। समिति ने शहरवासियों से परिवार सहित महोत्सव में शामिल होने की अपील की है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, फरीदाबाद कालीबाड़ी केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और समाज सेवा का भी केंद्र है। यहां नियमित लंगर सेवा के साथ बच्चों के लिए नि:शुल्क चित्रकला, कंप्यूटर और नृत्य की कक्षाएं भी चलाई जाती हैं। रक्तदान और अंगदान के प्रति जागरूकता जैसी पहल के माध्यम से संस्था समाज सेवा में योगदान दे रही है।