पीएम मोदी ने अरविंद मिल के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का किया लोकार्पण

- वाराणसी को मिली गारमेंट फैक्ट्री की सौगात, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
- पूर्वांचल के हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार!
- पीएम मोदी ने कामगार महिलाओं से संवाद भी किया
सुशील कमार मिश्र/ वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आयें और हमेशा की तरह इस बार भी काशीवासियों को सौगात दी। मिर्जामुराद के खोचवां में अहमदाबाद गुजरात की कपड़ा निर्माता कंपनी अरविंद लिमिटेड (अरविंद मिल्स) के लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 7-8 एकड़ में बने पहले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उन्होंने शुभारंभ किया तथा यहां पर कार्य का प्रशिक्षण ले रही मातृ शक्तियों से सीधा संवाद किया। निश्चित रूप से इस औद्योगिक प्लांट में स्थानीय ही नहीं पूर्वांचल के हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। इतना ही नहीं स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है और 300 से ज्यादा महिलाओं की भर्ती हो भी चुकी है, जिन्हें यूनिट में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल कपड़ा और परिधान निर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करेगी।
बताते चलें कि पूर्वांचल में अरविंद मिल्स का यह पहला बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है। प्लांट शुरू होने के बाद 2 फेस का निर्माण होगा, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। काशी के इस नए प्लांट में स्पोर्टस वियर, अंडर गारमेंट आदि कपड़े का उत्पादन होगा।यहां जॉकी, यूएस पोलो और एरो जैसे ब्रांड्स का निर्माण होगा।
अरविंद मिल्स सिर्फ कपड़ा बनाने वाली कंपनी नहीं है। यह धागे और कपड़े से लेकर तैयार कपड़ों तथा औद्योगिक इस्तेमाल के विशेष वस्त्रों तक का कारोबार करती है। इसकी शुरुआत 1931 में हुई थी और इसका मुख्यालय अहमदाबाद, गुजरात में है। यह डेनिम के कपड़े (इससे जींस बनाई जाती है) के साथ सूती व लिनेन के कपड़े, सादे कपड़े, सूट के लिए फैब्रिक, स्पोर्ट्सवियर के साथ घरेलू और विदेशी परिधान ब्रांडों को कपड़ा उपलब्ध कराती है।
प्रधानमंत्री ने शुभारंभ के पश्चात मिल के पदाधिकारियों से वहां पर बनाए जा रहे कपड़ों, खादी के बने कपड़ों एवं उनके मैटेरियल के बारे में जानकारी ली। "अपना हुनर अपनी पहचान" के दृष्टिगत महिलाओं से संवाद किया। उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों, उनकी चुनौतियों के बाबत विस्तार से जानकारी ली। अरविन्द मिल्स द्वारा उत्पादित कपड़ों की लगाई गई प्रदर्शनी का भी उन्होंने अवलोकन किया।
इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इससे पूर्व मिर्जामुराद के खोचवां पहुंचने पर हेलीपैड पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया।
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के पीछे छिपा एक महत्वपूर्ण रॉ मैटेरियल - रेत
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है, और उत्तर प्रदेश एवं बिहार इसमें पीछे नहीं है। राज्यों में सड़कों, पुलों या घरों की बात करें तो हर जगह निर्माण कार्य बढ़ रहे हैं। लेकिन इन सबके पीछे एक जरूरी चीज़ है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, वह है रेत। पानी के बाद, रेत और बजरी वो प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। हर साल करीब 5,000 करोड़ टन रेत और बजरी की खपत होती है, सोचिए कितना बड़ा आंकड़ा है ये।
उत्तर प्रदेश में खासकर बनारस और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण कार्य के लिए रेत या तो गंगा के तट से आती है अथवा सोन नदी घाट जो कि बनारस से 145 km की दूरी पर बिहार के देहरी ऑन सोन में स्थित है, वहां से ट्रकों द्वारा लायी जाती है ।



