महिला सिपाही की मौत के मामले में कोचिंग संचालक गिरफ्तार

- पिता ने मानसिक प्रताड़ना के साथ पुलिस विभाग पर भी लगाए गंभीर आरोप
पायनियर संवाददाता । घाटमपुर
रेउना थाना क्षेत्र में महिला सिपाही की आत्महत्या के मामले में पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दोनो के बीच नौ महीने में पांच हजार से अधिक बार फोन पर बातचीत हुई। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के मुताबिक, दोनों की एक बार में करीब चार घंटे तक बातचीत हुई थी। पुलिस ने आरोपी कोचिंग संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। अमेठी के मोहनगंज थाने में तैनात प्रतीक्षा सिंह 30 सितंबर को सात दिन की छुट्टी लेकर अपने घर कानपुर के रेउना थाना क्षेत्र पहुंची थी। दोपहर करीब दो बजे उसकी छोटी बहन कमरे में पहुंची तो वह फंदे से लटकी मिली। सूचना पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच की। इस दौरान महिला सिपाही का मोबाइल फोन रिसेट मिला। पुलिस के अनुसार, प्रतीक्षा ने वर्ष 2022 में गजनेर स्थित विक्रम सिंह चंदेल की कोचिंग में दाखिला लिया था। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और बाद में प्रेम संबंध हो गए। वर्ष 2025 में प्रतीक्षा का पुलिस में चयन हो गया और उसकी तैनाती अमेठी में हुई। विक्रम सेना से वर्ष 2019 में सिपाही पद से सेवानिवृत्त हुआ था। वह शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक, नौकरी लगने के बाद प्रतीक्षा की किसी अन्य व्यक्ति से भी बातचीत होने लगी थी। इसकी जानकारी विक्रम को हुई तो दोनों के बीच विवाद होने लगे। 30 सितंबर को आत्महत्या वाले दिन भी दोनों के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हुई। पहली बार सुबह करीब 30 मिनट, दूसरी बार सुबह 11 बजे करीब 15 मिनट और तीसरी बार दोपहर दो से तीन बजे के बीच करीब 45 मिनट तक बात हुई थी। इसके बाद प्रतीक्षा ने अमेठी में तैनात एक अन्य सिपाही से करीब 30 से 35 मिनट बातचीत की। फिर मोबाइल रिसेट कर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में विक्रम ने बताया कि घरवाले उसकी शादी तय करना चाहते थे। इसी बात को लेकर घटना वाले दिन दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई
मृतका के पिता विजय सिंह ने कोचिंग संचालक पर बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उनकी तहरीर पर पुलिस ने विक्रम के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पिता का कहना है कि आरोपी उनकी बेटी को बहन बताकर घर आता-जाता था, लेकिन बाद में उसे मानसिक रूप से परेशान करने लगा। विजय सिंह ने बेटी की तैनाती वाले मोहनगंज थाने में विभागीय सहकर्मी पर भी मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बेटी को करियर और जीवन बर्बाद करने की धमकियां दी जा रही थीं। अवकाश नहीं देने और कार्यस्थल पर प्रताड़ित किए जाने की बात भी उन्होंने कही है। पिता के मुताबिक, जब भी प्रतीक्षा घर आती थी तो डरी-सहमी रहती थी। कई बार पूछने पर भी उसने अपनी परेशानी साझा नहीं की। पुलिस अब दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।



