स्वतंत्रनिर्भीक पत्रकारिता
BREAKING NEWS
बीकेटी में भरभराकर गिरी कच्चे मकान की छत,वृद्ध की दबकर मौतट्रेड शो में जेन अल्फा के हाथों में आई 'दुनिया की कमान'यूपी में राज्यसभा और एमएलसी चुनाव के लिए जोड़-तोड़ तेजप्रदेश के 63 जिलों में अतिवृष्टि, राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देशतूफान-बारिश ने मचाई तबाही, जनजीवन अस्त-व्यस्तलखनऊ में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल, जलभराव पर सियासत शुरूतीन दिन से बिजली गुल, बारिश के बीच बढ़ी ग्रामीणों की परेशानीगहरे गड्ढे में फंस रहे वाहन, हादसे का खतराशार्टसर्किट से पेट्रोल पंप के चेंबर में लगे गेज में आग लगने से मचा हडकंपयमुनानगर पहुंचने से पहले हादसे में रिसर्च साइंटिस्ट की मौत, क्षतिग्रस्त कार में मिला शवबीकेटी में भरभराकर गिरी कच्चे मकान की छत,वृद्ध की दबकर मौतट्रेड शो में जेन अल्फा के हाथों में आई 'दुनिया की कमान'यूपी में राज्यसभा और एमएलसी चुनाव के लिए जोड़-तोड़ तेजप्रदेश के 63 जिलों में अतिवृष्टि, राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देशतूफान-बारिश ने मचाई तबाही, जनजीवन अस्त-व्यस्तलखनऊ में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल, जलभराव पर सियासत शुरूतीन दिन से बिजली गुल, बारिश के बीच बढ़ी ग्रामीणों की परेशानीगहरे गड्ढे में फंस रहे वाहन, हादसे का खतराशार्टसर्किट से पेट्रोल पंप के चेंबर में लगे गेज में आग लगने से मचा हडकंपयमुनानगर पहुंचने से पहले हादसे में रिसर्च साइंटिस्ट की मौत, क्षतिग्रस्त कार में मिला शव

मृत यात्री के पास से टिकट न मिलने मात्र से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता : न्यायालय

मृत यात्री के पास से टिकट न मिलने मात्र से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता : न्यायालय

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2017 में गुजरात में चलती ट्रेन से गिरकर मारे गए एक व्यक्ति के माता-पिता को दिया गया मुआवजा बहाल करते हुए कहा है कि किसी मृत रेल यात्री के पास से टिकट बरामद नहीं होने मात्र से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने गुजरात उच्च न्यायालय का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें महेशभाई के माता-पिता को दिया गया मुआवजा खारिज कर दिया गया था। महेशभाई 27 सितंबर 2017 को अहमदाबाद के रास्ते सूरत जा रहा था और वह ट्रेन में अचानक झटका लगाने के कारण सामान्य डिब्बे से नीचे गिर गया था। पीठ ने शुक्रवार को कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने रेल टिकट नहीं मिलने को जरूरत से ज्यादा

महत्व दिया और पीड़ित के पिता द्वारा शपथ लेकर दिए गए बयान एवं इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि पीड़ित एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा था। उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पीड़ित एक वैध यात्री था और उसका टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता।’’ रेलवे दावा अधिकरण ने 17 जून 2022 को माना था कि महेशभाई एक ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण घटना’’ का शिकार हुआ और वह ट्रेन से दुर्घटनावश गिरा था। अधिकरण ने उसके माता-पिता को आठ लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था और उन्हें घटना की तारीख से आदेश की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिए जाने को कहा गया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 27 सितंबर 2017 की घटना में महेशभाई गंभीर रूप से घायल हुआ था और इसके बाद वह एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा। पीठ ने कहा, ‘‘31 अक्टूबर 2017 को उसकी मौत हो गई। सामान्य परिस्थितियों में, जब पीड़ित का इलाज चल रहा था, तो यह संभावना बहुत कम है कि दावेदारों ने रेल टिकट संभालकर रखा होगा।’’
न्यायालय ने कहा कि दावेदार की ओर से शपथ लेकर बयान दिए जाने के बाद तथ्यों को गलत साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे पर थी, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहा। सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अधिकरण ने सही निष्कर्ष निकाला था कि पीड़ित एक वैध यात्री था और टिकट नहीं मिलने को दावेदारों के खिलाफ नहीं माना जा सकता।

पीठ ने कहा कि महेशभाई के माता-पिता ने दावा किया था कि उसका टिकट, रूमाल, कलाई घड़ी, कंघी और 800 से 900 रुपये नकद गायब हो गए थे। उसके पिता ने शपथ लेकर कहा था कि उनके बेटे ने टिकट खरीदा था। उसने कहा कि इससे दावेदारों का शुरुआती दायित्व पूरा हो गया और इसके बाद इस दावे को गलत साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे की थी। न्यायालय ने कहा कि महेशभाई के माता-पिता द्वारा अधिकरण में मुआवजे का दावा दाखिल किए जाने के बाद अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट तैयार की थी। पीठ ने कहा, ‘‘यह रिपोर्ट आखिरकार 17 मई 2018 को तैयार की गई, जो घटना के करीब सात महीने बाद की है। जांच में देरी के लिए दावेदारों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और रेलवे अपनी ओर से जांच रिपोर्ट तैयार करने में हुई देरी का लाभ नहीं उठा सकता।’’ पीठ ने कहा कि वह इस जांच रिपोर्ट को नजर अंदाज करने के पक्ष में है और यह रिपोर्ट दावेदारों को मुआवजा मिलने में बाधा नहीं बन सकती। पीठ ने रेलवे दावा अधिकरण द्वारा 17 जून 2022 को दिए गए आठ लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को बहाल करते हुए निर्देश दिया कि यह राशि महेशभाई के माता-पिता को 30 दिन के भीतर दी जाए।

साझा करें:fxw
हर खबर, हर पल — जुड़े रहें!हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए हमारे न्यूज़लेटर से जुड़ें