गुरुग्राम में महा-ब्लैकआउट के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार: पंकज डावर

गुरुग्राम। कांग्रेस जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने गुरुग्राम में बिजली कर्मियों की हड़ताल से पैदा हुए महा-ब्लैकआउट के लिए सीधे भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार के निजीकरण के तुगलकी फैसले ने साइबर सिटी की सांसें थाम दी हैं। उन्होंने कहा कि गुड़गांव के पांच लाख घरों में अंधेरा है और 3400 करोड़ का उद्योग ठप पड़ा है, लेकिन सरकार कर्मचारियों की मांग और विरोध को गंभीरता से नहीं ले रही है।
पंकज डावर ने कहा कि हरियाणा की आर्थिक राजधानी का यह हाल सरकार की जनविरोधी नीतियों का नतीजा है। जिले के कुल 8.5 लाख उपभोक्ताओं में से करीब 5 लाख परिवार भीषण ब्लैकआउट झेल रहे हैं। साइबर सिटी की चमक अंधेरे में बदल गई है।
उन्होंने कहा कि सोहना में भी हालात बेकाबू हैं। दो बड़े पावर हाउस के 12 फीडर ठप होने से सोहना शहर समेत 30 से ज्यादा गांवों में पूरी तरह अंधेरा पसरा है। सर्कल-1 के 12 और सर्कल-2 के 14 फीडर सुबह से बंद हैं, जिससे जनजीवन पटरी से उतर गया है।
1650 फैक्ट्रियां बंद, 3400 करोड़ का नुकसान
पंकज डावर ने कहा कि हड़ताल का सबसे बड़ा वार उद्योगों पर पड़ा है। दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर-37 जैसे प्रमुख क्षेत्रों की 1650 से अधिक फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप है, जिससे कुछ ही घंटों में 3400 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। करोड़ों का कच्चा माल बर्बाद होने की कगार पर है।
5000 शिकायतें, जवाब कुछ नहीं मिल रहा
कांग्रेस नेता ने बताया कि घरों में इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं और बिजली न होने से पानी की सप्लाई भी ध्वस्त हो गई है। लोगों ने सुबह 9 से शाम 6 बजे के बीच डीएचबीवीएन के टोल-फ्री नंबर पर 5000 से ज्यादा शिकायतें कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि सर्कल-1 के 826 में से 816 और सर्कल-2 के 557 में से 548 कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
पंकज डावर ने कहा कि सरकार ने पावर हाउसों को छावनी में तो बदल दिया, पुलिस तैनात कर दी, लेकिन जनता के अंधेरे का समाधान नहीं किया। बिजली कब आएगी, इसका जवाब न अफसरों के पास है, न सरकार के पास। यह सरकार की नाकामी नहीं तो और क्या है? उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत निजीकरण का फैसला वापस ले और कर्मचारियों से बात कर हड़ताल खत्म कराए।



