गैस बिल अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगी, अंशु सपरा के खाते से उड़ाए 4.99 लाख रुपये

एक महीने बाद भी रकम वापसी का इंतजार, बैंक और पुलिस से कार्रवाई की मांग
पायनियर समाचार सेवा। फरीदाबाद
गैस बिल अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगी का शिकार हुईं अंशु सपरा को करीब एक महीने बाद भी अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने का इंतजार है। पीड़िता के अनुसार, 8 सितंबर 2026 को उनके बैंक खाते से दो अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल 4,99,764 रुपये निकाल लिए गए। मामले में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, उनके मुताबिक, अब तक न तो ठगी की रकम वापस मिली है और न ही आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के संबंध में उन्हें संतोषजनक जानकारी मिली है।
ऐसे हैक किया मोबाइल
अंशु सपरा, निवासी सेक्टर-29, फरीदाबाद, ने अपनी शिकायत में बताया कि ठगों ने उनके पति योगेश के व्हाट्सऐप पर अडानी गैस से जुड़ा कर्मचारी बनकर संपर्क किया। पति ने नंबर उन्हें दिया, जिसकेे बाद उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया और गैस बिल अपडेट करने के नाम पर व्हाट्सऐप के जरिए एक फाइल भेजी गई। पीड़िता के अनुसार, उनसे 10 रुपये का भुगतान करने की बात कही गई। इस प्रक्रिया के बाद उनका मोबाइल फोन कथित तौर पर हैक हो गया और खाते से बिना अनुमति के रकम निकाल ली गई। शिकायत में दिए गए बैंक लेनदेन के विवरण के मुताबिक, 8 सितंबर को पहली ट्रांजैक्शन में 4 लाख रुपये और दूसरी ट्रांजैक्शन में 99,764 रुपये ट्रांसफर हुए। इस तरह कुल 4,99,764 रुपये की चपत लगी। पीड़िता ने दोनों लेनदेन की जानकारी, ट्रांजैक्शन आईडी और संबंधित बैंक खातों का विवरण शिकायत में उपलब्ध कराया है।
कोई ठोस नतीजा नहीं
अंशु सपरा ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल/हेल्पलाइन पर शिकायत के तहत मामला दर्ज कराया है। उन्होंने अपने बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक की फ्रॉड टीम और नोडल अधिकारियों से अनुरोध किया है कि संबंधित बैंकों के साथ तत्काल समन्वय कर उन खातों में उपलब्ध ठगी की रकम को रोकने और उसे वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए, जिनमें पैसा ट्रांसफर हुआ। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने जांच के लिए जरूरी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन अब तक रकम की वापसी को लेकर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। उन्होंने पुलिस और बैंक अधिकारियों से मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने, लेनदेन से जुड़े खातों की जांच कराने और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।
बैंक और पुलिस से कार्रवाई की उम्मीद
साइबर ठगी के इस मामले में अब पीड़िता को अपनी रकम वापस मिलने का इंतजार है। उनका कहना है कि समय पर संबंधित बैंक खातों में धनराशि रोकने और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय से रकम की बरामदगी की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, ठगी की रकम फिलहाल रोकी गई है या नहीं, उसकी वापसी की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और आरोपियों की पहचान हुई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। पीड़िता ने संबंधित बैंक और पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले में जल्द कार्रवाई कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।