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किसान पुत्र प्रशांत शुक्ला ने पाई पीएचडी की उपाधि

किसान पुत्र प्रशांत शुक्ला ने पाई पीएचडी की उपाधि

पायनियर संवाददाता। सुलतानपुर

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के देहली बाजार क्षेत्र के शुकुलपुर गांव निवासी प्रशांत शुक्ला ने कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और निरंतर संघर्ष के बल पर देश के प्रतिष्ठित कृषि अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर अपने परिवार, गांव और जिले का नाम रोशन किया है। एक साधारण किसान परिवार से प्रशांत शुक्ला के पिता राजदेव शुक्ला छोटे किसान हैं तथा खेती के साथ-साथ गांव के बाजार में गुड़ का छोटा व्यवसाय कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और अनेक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

प्रशांत की शैक्षणिक यात्रा संघर्ष और सफलता का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने उत्तर प्रदेश संयुक्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी प्रवेश परीक्षा (यूपीकैटेट) उत्तीर्ण कर आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या में कृषि अभियांत्रिकी विषय में स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया। स्नातक शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी विषय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की।

इसके बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कनिष्ठ एवं वरिष्ठ अनुसंधान अध्येतावृत्ति परीक्षा में सफलता प्राप्त की। इस उपलब्धि के आधार पर उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी विषय में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश मिला। यहां उन्होंने सफलतापूर्वक अपना शोध कार्य पूर्ण कर डाक्टरेट की उपाधि अर्जित की। प्रशांत की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है। ग्रामीणों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो आर्थिक अभाव भी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकते। प्रशांत शुक्ला ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, परिवार के सहयोग, गुरुजनों के मार्गदर्शन तथा ईश्वर की कृपा को दिया है। प्रशांत शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे सुल्तानपुर जनपद, प्रदेश और देश के ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

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