बीएचयू के दृश्य कला संकाय के चित्रकला विभाग में राष्ट्रीय फ्रेस्को चित्रण कार्यशाला का आयोजन

50 से अधिक युवा कलाकार परम्परागत विधि को नवीन कल्पना में कर रहे आत्मसात
पायनियर समाचार सेवा। वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रारंभ से ही भारत की परंपरा और संस्कृति के साथ नवीनता को भी अपनाता आया है। इसके संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी का मानना था कि यही वह मार्ग है, जिस पर चलकर भारत विश्वगुरू बन सकता है।
मालवीय जी की इसी विचारधारा से प्रेरित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला दृश्य कला संकाय के चित्रकला विभाग में दिनांक 5 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। दस दिवसीय इस कार्यशाला में महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, हरियाणा समेत अनेक राज्यों के युवा कलाकार तथा कला विद्यार्थी प्राचीन भारतीय भित्ति चित्रण विधा 'आराइश' का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। मूल रूप से यह चित्रण विधा राजस्थान में, विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियों और महलों के चित्रांकन में प्रयुक्त की जाती रही है। वर्तमान में इस तकनीक को जानने वाले कलाकारों की संख्या नगण्य है।
इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित कलाकार जयपुर के डॉ. नाथूलाल वर्मा उनमें से एक हैं। वह एक ख्याति प्राप्त परंपरागत चित्रकार और राजस्थान विश्वविद्यालय से सेवानिवृत प्रोफेसर हैं। उन्होंने इसका प्रशिक्षण अपने कलागुरु पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत से प्राप्त किया था। इस कार्यशाला में डॉ. नाथूलाल वर्मा चित्रण पद्धति का लाइव डेमोंसट्रेशन देते हुए इसके इतिहास, तकनीकी बारीकियों और चित्रण सामग्री के संबंध में विस्तार से बतायेंगे। इसके साथ ही समकालीन कला के अनुरूप उन्होंने युवा कलाकारों को अपनी पसंद के संयोजन तैयार करने हेतु भी प्रोत्साहित किया है।
इस कार्यशाला का समन्वयन दृश्य कला की संकायप्रमुख एवं चित्रकला विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. जसमिंदर कौर के निर्देशन में किया जा रहा है और आयोजन सचिव के रूप में डॉ. सुरेश जांगिड़ इसका आयोजन करवा रहें हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, कि इसमें उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त अन्य राज्यों के 30 कलाकार और वाराणसी के 20 युवा कलाकार, जिनमें दक्षिण कोरिया और मॉरीशस के विद्यार्थी भी प्रतिभाग कर रहे हैं। उनके मध्य सांस्कृतिक और कलात्मक आदान-प्रदान से भारतीय कला में एक नवाचार का अंकुरण होगा। यह कार्यशाला काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रायोजित शोध एवं औद्योगिक परामर्श प्रकोष्ठ के वित्तीय सहयोग से आयोजित की जा रही है।
प्रतिभागियों के लिए पूर्ण रूप से निशुल्क इस कार्यशाला में उन्हें कला सामग्री, फ्रेस्को टाइल तथा भोजन की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस कार्यशाला में सृजित की जाने वाली सभी कलाकृतियां चित्रकला विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पास ही रहेंगी। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर विषय विशेषज्ञ डॉ. नाथू लाल वर्मा द्वारा फ्रेस्को चित्रण तकनीक पर व्याख्यान दिया गया तथा फ्रेस्को चित्रण की विधाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही उन्होंने 'आराइश' की विशेषताओं और तकनीकी बारीकियों को भी समझाया। यह कार्यशाला दिनांक 15 अक्टूबर तक चलेगी। उद्घाटन के अवसर पर सुरेश नायर, डॉ. ललित मोहन सोनी, विजय भगत, डॉ. किरण गुप्ता, डॉ. मिथुन दत्ता, डॉ. सुनील पटेल समेत अनेक कला आचार्य, शोधार्थी, विद्यार्थी और कला प्रेमी उपस्थित रहे।



