फिल्म “बांद्रा बॉय” सच और अफवाह के बीच की पतली रेखा को प्रभावी तरीके से दर्शाती है। विख्यात टीवी जर्नलिस्ट नीरू शर्मा की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म बताती है कि सुर्खियां सच से पहले चल जाती हैं, और धारणाएं किसी ठोस सबूत से पहले बन जाती हैं। समकालीन विषय पर बनी और सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म केवल रोमांच नहीं देती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है। चूंकि नीरू शर्मा खुद दो दशकों से मीडिया में रही हैं इसलिए उन्होंने अपने अनुभवों की रौशनी में, मीडिया की कार्यप्रणाली और इमेज बनाने बिगाड़ने के खेल को इस फिल्म में असरदार ढंग से दिखाया है। फिल्म के टाइटल और इसकी कहानी को देखकर दर्शकों के मन मस्तिष्क में फिल्म इंडस्ट्री का एक चर्चित केस सामने आ जाता है मगर डायरेक्टर ने जिस अंदाज से इसे प्रस्तुत किया है वह देखने लायक है।
फिल्म में एक मशहूर हस्ती सिद्धार्थ ओबेरॉय (अह्वान कुमार) को पुलिस एक छापे के दौरान पकड़ लेती है मगर उसके पास न तो ड्रग्स मिलते हैं और न ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है मगर उसे फंसाने का खेल चलता है. उसका बाप देवराज ओबेरॉय (धर्मेंद्र गोहिल) मामले को खत्म करने के लिए करोड़ों की सौदेबाजी करता है इस बीच मीडिया में एक वीडियो क्लिप चला दिया जाता है जिसके बाद आता है कहानी में मोड़। क्लाईमेक्स आपको चौंकाने मे सफल रहता है उसके लिए फिल्म देखनी होगी।
जहां तक एक्टिंग की बात है अह्वान कुमार ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। वहीँ धर्मेंद्र गोहिल की प्रभावशाली अदाकारी किरदार को हकीकत के करीब बनाती है. सहायक कलाकारों में यश पेडणेकर, लोचन बरसागड़े, पवन तिवारी, श्याम थोंबरे, ऐश्वर्या मनोहर और हिमांशी मंडलिया ने भी अपने पात्रों के साथ इन्साफ़ किया है। केवल 21 मिनट की फिल्म होने के बावजूद तमाम किरदार स्क्रीनप्ले का अहम हिस्सा दिखाई देते हैं और यही खूबी बांद्रा Boy को एक कामयाब प्रयास बनाती है। फिल्म एक संपूर्ण फीचर फिल्म का एहसास दिलाती है यही कारण है कि इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान मिली है। New York International Women Festival में यह फिल्म विनर बनकर उभरी है।
जहां तक निर्देशन का सवाल है हालांकि बतौर डायरेक्टर नीरू शर्मा की यह पहली कोशिश है, मगर इसकी प्रस्तुति में जो मैच्योरिटी नजर आती है, वह इसे एक स्तरीय सिनेमा की सूची में शामिल करवा देती है. फिल्म की पटकथा ऑडिएंस की दिलचस्पी बनाए रखती है और स्टोरी अंत तक अपने उद्देश्य से नहीं भटकती है। मीडिया की भूमिका और जनमत जैसे संवेदनशील विषयों को फिल्म में सहजता से पिरोया गया है। फिल्म तकनीकी पहलुओं मे भी मजबूत है। कौशल महावीर का असरदार बैकग्राउंड स्कोर हो या आयुष शाह का ग़ज़ब का कैमरा वर्क या संदीप कुरुप की चुस्त एडिटिंग हो सभी ने मिलकर फिल्म को एक प्रभावशाली रूप दिया हैं।
बीस साल तक मीडिया से जुड़ी रही नीरू शर्मा ने ‘बांद्रा बॉय’ में एक ऐसे सब्जेक्ट को ब्यान किया है जो आज के सोशल मीडिया युग में बहुत प्रासंगिक है। फिल्म यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस तरह धारणाएं बनती हैं और कई बार हकीकत से पहले ही लोगों के बारे में नतीजा तय हो जाता है। ब्रेकिंग न्यूज देने के चक्कर में कई बार किसी की इमेज धुँधला दी जाती है और उसका पूरा कैरियर दांव पर लग जाता है। ‘बांद्रा बॉय’ नीरू शर्मा के निर्देशन करियर की एक धारदार शुरुआत है। यह कहीं से भी शॉर्ट फिल्म नहीं बल्कि एक फीचर फिल्म लगती है और इसके लिए सारा क्रेडिट डायरेक्टर नीरु शर्मा को जाता है. मीडिया जगत से जुड़े कई लोग मशहूर फिल्म मेकर बने हैं अब उसी सूची में नीरु शर्मा का नाम भी जुड़ गया है। खैर ये तो अभी शुरुआत है उनके निर्देशन में दर्शक कई और फिल्म भी देखेंगे।
फिल्म समीक्षा: ‘बांद्रा बॉय’
निर्देशक : नीरू शर्मा
बैनर: निरुवाना क्रिएशंस
कलाकार: अह्वान कुमार, धर्मेंद्र गोहिल, लोचन बरसागड़े, यश पेडणेकर, पवन तिवारी, श्याम थोंबरे, ऐश्वर्या मनोहर, हिमांशी मंडलिया
रेटिंग: 3.5 स्टार्स










