अधूरी सड़क बनी मरीजों की मुसीबत, धूल और जाम में फंस रहा अस्पताल
टूटे रास्ते से अस्पताल के गेट तक लगता है जाम

- निगम मुख्यालय के पास दशहरा मैदान वाली सड़क करीब पांच महीने से अधूरी
- धूल के गुबार के बीच गुजरती हैं एंबुलेंस और आम जनता
कविता। फरीदाबाद
शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल बीके अस्पताल और नगर निगम मुख्यालय के आसपास की सड़क अब खुद व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर बन गई है। नगर निगम मुख्यालय के मुख्य द्वार के सामने से दशहरा मैदान की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण करीब पांच महीने से अधूरा पड़ा है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी परत और उड़ती धूल से मरीज, तीमारदार, राहगीर और वाहन चालक परेशान हैं। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब मरीजों को लेकर एंबुलेंस इस टूटे रास्ते से गुजरती है। गड्ढों से एंबुलेंस के हिचकोले खाने के कारण अंदर मौजूद मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
अधूरी सड़क के कारण बीके अस्पताल के मुख्य गेट और नगर निगम कार्यालय के बाहर अक्सर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। पीक आवर्स में स्थिति और बिगड़ जाती है। नीलम चौक और बीके चौक की ओर से आने वाला यातायात इस मार्ग पर दबाव बढ़ाता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है और इसका असर आसपास के पूरे यातायात पर पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के सामने सड़क की यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा।
पांच महीने से काम अधूरा, उड़ रही धूल
दशहरा मैदान की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण शुरू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें गड्ढों और जाम से राहत मिलेगी। लेकिन करीब पांच महीने बीतने के बाद भी सड़क पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी। निर्माण स्थल पर वाहनों के गुजरने से लगातार धूल उड़ती रहती है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। आसपास के दुकानदार और राहगीर भी धूल से परेशान हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की खराब हालत केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है। गंभीर मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस जब टूटे हिस्से से गुजरती है तो गड्ढों के कारण झटके लगते हैं। इससे मरीजों और उनके साथ मौजूद परिजनों को परेशानी होती है।पहले पैचवर्क भी नहीं दे पाया स्थायी राहत
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल और निगम के सामने की सड़क भी गड्ढï़ों में तद्ब्रदील हो गई है। उसकी हालत सुधारने के लिए पहले भी कई बार पैचवर्क कराया गया, लेकिन कुछ समय बाद सड़क फिर उखड़ गई। उनका कहना है कि बार-बार अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़क का टिकाऊ निर्माण जरूरी है। नगर निगम मुख्यालय और बीके अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के बीच स्थित इस सड़क पर दिनभर बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही रहती है।करीब 1.76 करोड़ की सड़क योजना
नगर निगम ने इस सड़क के नए सिरे से निर्माण के लिए करीब 1 करोड़ 76 लाख रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत निगम मुख्यालय के मुख्य गेट के सामने से दशहरा मैदान की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण किया जाना है। यह मार्ग नगर निगम कार्यालय के साथ बीके अस्पताल, एनआईटी बस स्टैंड, सैनिक कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी और आसपास के रिहायशी एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को जोड़ता है। निगम के अनुसार सड़क का निर्माण उच्च गुणवत्ता वाले तारकोल से कराया जाएगा। जलभराव रोकने के लिए सड़क की उचित ढलान और जल निकासी की व्यवस्था भी की जाएगी। निगम ने अप्रैल माह में 10 दिन में निर्माण कार्य शुरू कराने का दावा किया था। लेकिन सितंबर तक भी सड़क नहीं बनी। अब देखने वाली बात यह होगी कि करीब पांच महीने से अधूरी पड़ी सड़क का निर्माण वास्तव में कब शुरू होता है और मरीजों व राहगीरों को धूल, गड्ढों और जाम से कब राहत मिलती है।-----



