आईएमएस-बीएचयू में लिक्विड बायोप्सी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

सर सुंदरलाल अस्पताल में प्रतिवर्ष लगभग 25,000 नए कैंसर रोगी आते हैं : प्रोफेसर मनोज पांडेय
पायनियर । वाराणसी
चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (आईएमएस-बीएचयू) के डीएचआर-आईसीएमआर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर आॅन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक सर्विसेज सेंटर द्वारा ‘‘डिकोडिंग कैंसर थ्रू लिक्विड बायोप्सी: फ्रॉम सीएफ-डीएनए/सीएफ-आरएनए एक्सट्रैक्शन टू डीडीपीसीआर डेटा इंटरप्रिटेशन’’, विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (ऊऌफ) एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (कउटफ) के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कैंसर अनुसंधान में हो रही प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्त, और लार जैसे शरीर के द्रवों के माध्यम से त्वरित एवं मिनिमली इनवेसिव जांच संबंधी तकनीकें तेजी से विकसित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित कैंसर निदान के लिए ठोस ऊतक की बायोप्सी अभी भी मुख्य आधार है। उन्होंने बताया कि आईएमएस-बीएचयू में ऐसी आधुनिक तकनीकों का नैदानिक एवं अनुसंधान स्तर पर उपयोग किया जा रहा है, जिससे शोध प्रकाशनों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
आईएमएस के निदेशक प्रो. एस.एन. सांखवार ने बताया कि कार्यशाला में लगभग 50 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि वेट-लैब प्रशिक्षण, डेटा विश्लेषण तथा सामूहिक विकास पर केंद्रित यह कार्यशाला नए अनुसंधान एवं सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है।
चिकित्सा संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने के युवा वैज्ञानिकों एवं पीएचडी शोधार्थियों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना की।
अपने स्वागत संबोधन में सर्जिकल आॅन्कोलॉजी विभाग, आईएमएस-बीएचयू के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज पांडेय ने सेंटर के माध्यम से संस्थान में प्रिसिजन एवं ट्रांसलेशनल आॅन्कोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर सुंदरलाल अस्पताल में प्रतिवर्ष लगभग 25,000 नए कैंसर रोगी आते हैं। कार्यक्रम के दौरान ट्रांसलेशनल आॅन्कोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. रोही दीक्षित, डॉ. मोनिका राजपूत, डॉ. गौत्रिना और डॉ. रश्मि पटेल को सम्मानित किया गया। इन शोधकर्ताओं के कार्यों में पेटेंट, आणविक निदान, गट-माइक्रोबायोटा आधारित कैंसर अनुसंधान तथा अक आधारित कैंसर अनुसंधान शामिल हैं।
दो दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों को लिक्विड बायोप्सी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला में हैंड्स-आॅन प्रशिक्षण, केस-आधारित चर्चा तथा तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को उभरती हुई लिक्विड बायोप्सी तकनीकों की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है।



