21 पोल्ट्री इकाइयों में नियमों के पालन पर सवाल
चार राज्यों में जांच के दौरान पर्यावरण, स्वच्छता और पशु कल्याण से जुड़ी चिंताएं सामने आईं

नोएडा। चार राज्यों की 21 लेयर-हेन पोल्ट्री इकाइयों की जांच में पोल्ट्री संचालन से जुड़े नियमों के क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल उठे हैं। जांच में खास तौर पर पर्यावरणीय अनुमति, नियमित निरीक्षण, पशु कल्याण, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और बायोसिक्योरिटी से जुड़ी चिंताएं सामने आईं।
जांच के मुताबिक, मध्य प्रदेश की सात पोल्ट्री इकाइयों में से किसी के पास कथित तौर पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ नहीं थी। कुछ इकाइयों के खिलाफ 2024 में शिकायतें भी दर्ज की गई थीं। इनमें कथित तौर पर निर्धारित मानकों के उल्लंघन और जरूरी अनुमति नहीं होने की शिकायतें शामिल थीं। वर्ष 2026 में की गई जांच के दौरान सामान्य सार्वजनिक नोटिस जारी किए जाने के अलावा सीमित दिखाई देने वाली कार्रवाई दर्ज की गई।
सेंटिएंट के सीईओ अभिषेक पांडे ने कहा कि 21 इकाइयों में जांचकर्ताओं द्वारा दर्ज की गई समान परिस्थितियां चिंता का विषय हैं। उनके मुताबिक, निष्कर्ष निर्धारित मानकों और जमीन पर जानवरों व कर्मचारियों द्वारा अनुभव की जा रही परिस्थितियों के बीच अंतर की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने पोल्ट्री इकाइयों में मजबूत प्रवर्तन, नियमित निरीक्षण और अधिक जवाबदेही की जरूरत बताई।
जांच में करीब 3,000 से दो लाख मुर्गियों की अनुमानित क्षमता वाली इकाइयों को शामिल किया गया। चारों राज्यों में कई स्थानों पर पशु कल्याण, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और बायोसिक्योरिटी से जुड़ी समान चिंताएं दर्ज की गईं।



