सातवें दिन भी आशाओं का धरना जारी, सरकार को बताया आशा विरोधी

मिर्जापुर/शाहजहाँपुर। मानदेय वृद्धि समेत विभिन्न मांगों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आशा कार्यकर्ताओं का धरना सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनरत आशाओं का आरोप है कि एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन का कोई अधिकारी उनकी मांगों को सुनने तक नहीं पहुंचा, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इसी क्रम में जलालाबाद ब्लॉक की सीएचसी अल्लाहगंज में सैकड़ों आशाओं ने एकत्रित होकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। आशाओं ने सरकार को आशा विरोधी बताते हुए आशाओं की अनदेखी को लेकर नाराजगी व्यक्त की।
हड़ताल पर बैठी आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होने के बावजूद उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, नवजात शिशुओं की निगरानी से लेकर सरकार की तमाम स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, लेकिन इसके बदले न तो उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिलता है और न ही राज्य कर्मचारियों के समान सुविधाएं।
उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो हड़ताल को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखा जाएगा। वहीं आशाओं की हड़ताल का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। इधर, आशाओं के आंदोलन को आधार बनाकर विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो आशाएं दिन-रात गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाती हैं, सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने को भी तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की बेरुखी से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।


