रवि शंकर ने जीती महाना मेमोरियल शतरंज टूर्नामेंट की ट्रॉफी, कुलदीप शंकर को दूसरा स्थान
सारांश शुक्ला ने 4.5 अंक के साथ अंडर-16 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए जबकि आयुष यादव ने 6.5 अंक अर्जित करते हुए जूनियर अनरेटेड वर्ग की ट्रॉफी जीती।

पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। लखनऊ के रवि शंकर ने केबी महाना मेमोरियल शतरंज टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर विजेता ट्रॉफी अपने नाम कर ली। चेस क्लब ब्लैक एंड व्हाइट (सीसीबीडब्ल्यू) द्वारा शहर के एक निजी होटल में आयोजित टूर्नामेंट में रवि शंकर व संसद में उप निदेशक के पद पर कार्यरत कुलदीप शंकर ने अंतिम राउंड के बाद 7 में से 6-6 अंक हासिल किए। इसके बाद परिणाम जानने के लिए टाईब्रेक का सहारा लिया गया जिसमें रवि शंकर अव्वल रहे जबकि कुलदीप शंकर दूसरे स्थान पर रहे।
वहीं, टूर्नामेंट के स्टार खिलाड़ी मेडिकल स्कूल के छात्र और भावी चिकित्सक सिद्धांत चोपड़ा रहे जिन्होंने कई रेटेड पेशेवर खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा और सर्वश्रेष्ठ अनरेटेड खिलाड़ी चुने गए। इसके साथ सीनियर सिटीजन श्रेणी में सईद अहमद, शकीलुद्दीन, केके खरे, यूबी सिंह, मोहम्मद इरफान, जमाल, विपुल अवस्थी, आरपी गुप्ता और अंबुज अग्रवाल शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे।
दूसरी ओर सारांश शुक्ला ने 4.5 अंक के साथ अंडर-16 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए जबकि आयुष यादव ने 6.5 अंक अर्जित करते हुए जूनियर अनरेटेड वर्ग की ट्रॉफी जीती। नव्या श्रीवास्तव सर्वश्रेष्ठ जूनियर बालिका रहीं, जबकि कुंवर प्रणव सिंह अंडर-8 वर्ग में चैंपियन बने। दोनों ने 6-6 अंक हासिल किए।
टूर्नामेंट के दौरान चेस क्लब ब्लैक एंड व्हाइट (सीसीबीडब्ल्यू) ने शहर के प्रमुख शतरंज प्रशिक्षकों को भी सम्मानित किया। इनमें लखनऊ नगर निगम के डॉ.जुनैद अहमद, लखनऊ चेस सेंटर के सईद अहमद, राज्य कर विभाग के पवन बाथम, रक्षा विभाग के मयंक पांडेय, डीपीएस गोमतीनगर के दीप कुमार सिंह व रमा शंकर और डीपीएस एल्डिको के रवि शंकर शामिल रहे।
चैंपियनशिप के समापन समारोह में केबी महाना के पौत्र परीक्षित महाना ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने इस अवसर पर अपने दादा के शतरंज के प्रति लगाव को भी याद किया। गौरतलब है कि इस टूर्नामेंट का आयोजन इंजीनियर कृष्ण बलदेव महाना और उनकी पत्नी संतोष की स्मृति में किया गया। आर्य समाज से जुड़े केबी महाना ने 1950 के दशक में लखनऊ को राज्य संग्रहालय भवन और इंदिरा ब्रिज जैसी कई प्रतिष्ठित संरचनाएं दी थीं।



