राष्ट्र निर्माण में खेलों की अहम भूमिका, भारत खेल ढांचे पर बढ़ा रहा निवेश: मांडविया
भारत ने इस आयोजन के लिए मल्लखंब, योगासन और कलरिपयट्टू का चयन किया है।

अहमदाबाद। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को अहमदाबाद में ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रदर्शन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत खेलों को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा है। इसी सोच के तहत देश में खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर निवेश बढ़ाया जा रहा है।
ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रदर्शन का आयोजन एक दिन के लिए किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के पारंपरिक और स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देना तथा उनकी सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है। भारत ने इस आयोजन के लिए मल्लखंब, योगासन और कलरिपयट्टू का चयन किया है।
मांडविया ने कहा कि भारत खेलों के विकास के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपना रहा है। इसमें जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने, प्रतिभाओं की पहचान करने, बेहतर कोचिंग उपलब्ध कराने और खेल विज्ञान को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही खेल बुनियादी ढांचे का विस्तार, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के माध्यम से देश में एक मजबूत और टिकाऊ खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा रहा है, जो भविष्य में खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर प्रदान करेगा।
खेलो इंडिया पहल से प्रतिभाओं को मिलेगा प्रोत्साहन
खेल मंत्री ने सरकार की प्रमुख खेलो इंडिया पहल का उल्लेख करते हुए खेलों के लिए किए जा रहे बजटीय आवंटन और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत युवा खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण देने और देशभर में खेल सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।मांडविया के अनुसार, सरकार का लक्ष्य केवल वर्तमान में विश्वस्तरीय खेल ढांचा तैयार करना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी स्थायी खेल विरासत बनाना भी है, जिससे देश में खेल संस्कृति को मजबूती मिले।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही प्रशिक्षण, आवश्यक संसाधन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने से उनकी प्रतिभा को निखारने में मदद मिलेगी। साथ ही, खेल विज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण प्रणालियों के उपयोग से भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा सकेगा।
ब्रिक्स देशों की पारंपरिक खेल विरासत का प्रदर्शन
इस आयोजन में भारत के अलावा चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका सहित ब्रिक्स से जुड़े कुल 10 देश भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के माध्यम से सदस्य देशों के पारंपरिक खेलों को मंच देने और उनके बीच खेल एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।मांडविया ने खेलों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना देश के भविष्य में निवेश करने जैसा है। इससे न केवल युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारत को वैश्विक खेल मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।



