मासूमों की जान पर मंडरा रहा खतरा, स्कूल के पास घूम रहा मौत का साया - जिम्मेदार बेखबर
तालाब बना मौत का कुआं, दहशत में सहमे स्कूली बच्चे - प्रशासन मौन, वन विभाग ने साधी चुप्पी

गोला गोकर्णनाथ-खीरी। महेशपुर वनरेंज के आंवला बीट के रामखेड़ा गांव में प्राथमिक विद्यालय के निकट तालाब में पिछले 10 दिनों से मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। मगरमच्छ के खौफ से छात्र, शिक्षक और अभिभावक दहशत में हैं। कई बच्चे डर के कारण स्कूल नहीं जा रहे हैं, जिससे पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार मगरमच्छ दिन में लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है और तालाब से निकलकर गांव व स्कूल की ओर आ जाता है। ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर शोर मचाकर उसे भगाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा खतरा स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को है, जो रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं।
ग्रामीण देवेन्द्र कुमार, ब्रजकिशोर, सर्वजीत, मनोज कुमार, शिव प्रसाद और जगदीश ने बताया कि एक सप्ताह पहले ही वन विभाग के उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई थी, लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को मौके पर जाने पर तालाब में न तो कोई जाल लगा मिला और न ही वन विभाग की कोई टीम मौजूद थी।
बताया गया कि रेस्क्यू के नाम पर वन विभाग ने सिर्फ एसडीएम और लेखपाल को तालाब का पानी निकालने के लिए पत्र लिख दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब का पानी निकालने में हफ्तों लग जाएंगे, तब तक बच्चों की सुरक्षा कौन करेगा।
इस संबंध में वन दरोगा माया प्रकाश का कहना है कि "पानी निकलते ही रेस्क्यू कर लेंगे, जाल लगाया गया है और निगरानी की जा रही है।"
वहीं ग्रामीणों का सवाल है कि क्या विभाग के पास मगरमच्छ पकड़ने के लिए जाल, पिंजरा और प्रशिक्षित टीम नहीं है? क्या पूरे तालाब का पानी निकालना ही एकमात्र उपाय बचा है? अभिभावकों ने जिलाधिकारी और प्रभागीय वनाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू कराने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि जल्द रेस्क्यू नहीं हुआ तो वे अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देंगे।



