लेखपाल आंदोलन से अटकी जनता की राह, एडमिशन से छात्रवृत्ति तक पर संकट
आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे लोग

हजपुरा,अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ चरणबद्ध आंदोलन अब आम जनता के लिए परेशानी का सबब बनने लगा है। राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लेखपाल की रिपोर्ट के बिना इन जरूरी प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने के कारण लोगों को अपने काम के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा चिंता छात्र-छात्राओं को लेकर सामने आ रही है। किसी विद्यार्थी को कॉलेज में दाखिले के लिए प्रमाण पत्र चाहिए तो किसी को छात्रवृत्ति का आवेदन करने के लिए आय अथवा जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। समय से दस्तावेज नहीं मिलने पर आवेदन की अंतिम तिथि निकलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य से जुड़े जरूरी कार्य प्रभावित हो सकते हैं। लेखपाल संघ की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार तीन अक्टूबर को तहसील दिवस के बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया। आठ अक्टूबर को समस्त आॅनलाइन कार्यों का बहिष्कार, 10 अक्टूबर को थाना दिवस पर काली पट्टी बांधकर कार्य, 12 अक्टूबर को तहसील व जिला मुख्यालय पर रक्तदान शिविर लगाकर आंदोलन तथा 14 अक्टूबर को मोटरसाइकिल रैली निकालने का कार्यक्रम है।
इसके बाद 17 से 23 अक्टूबर तक तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन और 24 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन की घोषणा की गई है। लेखपाल संघ ने प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे की मांग, अंतर मंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति सूची जारी करने, लेखपालों की भर्ती में वृद्धि, पटलों से लेखपालों को हटाने, उच्च तकनीकी कार्यों के लिए लैपटॉप व मोबाइल उपलब्ध कराने तथा ग्राम सचिवालय में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित कई मांगें उठाई हैं। इधर, आंदोलन के चलते आम जनता की परेशानी लगातार बढ़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र समेत राजस्व से जुड़े अन्य कार्यों के लिए लोगों को लेखपाल की रिपोर्ट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आंदोलन यदि लंबा चला तो जरूरी सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य कार्यों के लिए दस्तावेज बनवाने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।
मानवाधिकार संघर्ष प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष पीएम मिश्रा ने कहा कि लेखपालों की मांगों पर शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए, लेकिन इसके साथ आम जनता के हितों का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है। आंदोलन के कारण किसी छात्र का दाखिला अथवा छात्रवृत्ति का आवेदन प्रभावित होना या किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जरूरी प्रमाण पत्र समय से न बन पाना गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से लेखपाल संघ के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल वार्ता कर मांगों का यथासंभव समाधान निकालने की मांग की, ताकि आंदोलन समाप्त हो और राजस्व व्यवस्था फिर से सुचारु रूप से पटरी पर लौट सके।


