गुलाबी मीनाकारी के फाइटर प्लेन में दिखा देशप्रेम, काशी के हुनर को मिला नया आसमान

- एयर शो से प्रेरित होकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पी कुंज बिहारी सिंह ने तैयार की लड़ाकू विमान की अनुकृति
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कलाकृति समर्पित करने की तैयारी, देश-विदेश से मिले करीब 100 पीस के ऑर्डर
- चांदी से बने फाइटर प्लेन को तैयार करने में लगा एक माह, कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी मांग
पायनियर समाचार सेवा
वाराणसी। गंगा के ऊपर भारतीय वायुसेना के शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन हो रहा है, तो काशी की गलियों में शिल्पकार अपने हुनर से देशप्रेम और सेना के प्रति सम्मान की भावना को नई पहचान दे रहे हैं। वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो से प्रेरित होकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त गुलाबी मीनाकारी के शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह ने लड़ाकू विमान की अनूठी अनुकृति तैयार की है। गुलाबी मीनाकारी की बारीक कारीगरी से सजी यह कलाकृति काशी की पारंपरिक कला और आधुनिक भारत की सैन्य शक्ति के संगम को दर्शाती है। शिल्पकार इस कलाकृति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित करना चाहते हैं।
एक माह की मेहनत से तैयार हुआ गुलाबी मीनाकारी का फाइटर प्लेन
कुंज बिहारी सिंह बताते हैं कि एयर शो की जानकारी मिलने के बाद ही उन्होंने गुलाबी मीनाकारी से लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी। इस कलाकृति को तैयार करने में करीब एक माह का समय लगा और इसमें 400 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना है कि गुलाबी मीनाकारी में हमेशा कुछ नया करने की कोशिश रहती है। इस बार भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन ने उन्हें ऐसी कलाकृति तैयार करने की प्रेरणा दी, जो देश की सैन्य शक्ति के साथ काशी की पारंपरिक कला को भी प्रदर्शित करे।
देश-विदेश से मिले करीब 100 पीस के ऑर्डर, कारीगरों के लिए खुल रही नई राह
शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह के मुताबिक, फाइटर प्लेन की तस्वीर कुछ ग्राहकों को भेजने के बाद उन्हें करीब 100 पीस के ऑर्डर मिले हैं। इनमें कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से मिली मांग भी शामिल है। गुलाबी मीनाकारी से तैयार इस उत्पाद को अलग-अलग आकारों में बनाने की मांग सामने आ रही है। इससे पारंपरिक शिल्प को नए बाजारों तक पहुंचाने और स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं बन रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी बनाई थी ब्रह्मोस मिसाइल की अनुकृति
कुंज बिहारी सिंह इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की अनुकृति भी गुलाबी मीनाकारी से तैयार कर चुके हैं। उनके अनुसार, इस कलाकृति को भी देश-विदेश में पसंद किया गया था। अब लड़ाकू विमान की नई कलाकृति के जरिए वह काशी की पारंपरिक कला को समकालीन विषयों से जोड़ रहे हैं। उनका प्रयास है कि गुलाबी मीनाकारी केवल सजावटी उत्पादों तक सीमित न रहे, बल्कि देश की उपलब्धियों, सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय गौरव को भी अपने भीतर समेटे।
योगी सरकार के संरक्षण से गुलाबी मीनाकारी को वैश्विक पहचान, युवाओं की बढ़ रही रुचि
कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि योगी सरकार की ओर से जीआई और ओडीओपी उत्पादों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए किए जा रहे प्रयासों से गुलाबी मीनाकारी को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिली है। आर्थिक सहायता, निःशुल्क टूल किट, प्रशिक्षण और उत्पादों की बेहतर पैकिंग से जुड़े अवसरों ने इस पारंपरिक हस्तशिल्प को आगे बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि सरकारी संरक्षण और प्रोत्साहन से इस कला के प्रति युवाओं की रुचि फिर बढ़ रही है। जो युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर हो रही थी, अब वह दोबारा इससे जुड़ने लगी है। इससे काशी की सदियों पुरानी शिल्प परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ कारीगरों की आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
ओडीओपी और जीआई उत्पादों से काशी के हुनर को नई पहचान
वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी अपनी बारीक कारीगरी, आकर्षक रंगों और पारंपरिक शिल्प शैली के लिए जानी जाती है। ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) और जीआई (भौगोलिक संकेतक) से जुड़ी इस कला को नए प्रयोगों के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है। एयर शो से प्रेरित होकर तैयार की गई लड़ाकू विमान की कलाकृति दिखाती है कि काशी के शिल्पकार अपनी विरासत को समकालीन विषयों और राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़कर नए अवसर तलाश रहे हैं। यह पहल कला, रोजगार और देशप्रेम को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।



