राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय कला पुरस्कार पाकर पूजा राजपूत ने बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव

38 वर्षों की कला-साधना को मिला सम्मान, ऋषिकेश में हुआ अभिनंदन
रजनी गोयल। ऋषिकेश
अपनी 38 वर्षों की कला-साधना और समर्पण के दम पर ऋषिकेश की कलाकार पूजा राजपूत ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। ललित कला अकादमी की 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में उनकी कलाकृति ‘प्रकृति शोषण’ को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने पर क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस उपलब्धि पर उग्रसेन नगर वेलफेयर कल्याण समिति और अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा की ओर से पूजा राजपूत का भव्य अभिनंदन किया गया। उन्हें पुष्पगुच्छ भेंटकर, माल्यार्पण और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। महासभा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी दशकों की मेहनत, रचनात्मकता और कला के प्रति समर्पण का परिणाम है। उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
पूजा राजपूत की पुरस्कृत कलाकृति ‘प्रकृति शोषण’ पर्यावरण के प्रति मानवीय व्यवहार और प्रकृति से जुड़े गंभीर विषयों को रेखांकित करती है। उग्रसेन नगर सोसायटी के अध्यक्ष रघुवंश ने उन्हें बधाई देते हुए इसे स्थानीय कलाकारों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया। पूजा राजपूत पूर्व में स्वर्गाश्रम जोंक की ग्राम प्रधान रह चुकी हैं और प्रसिद्ध व्यवसायी एवं समाजसेवी मनोज राजपूत की धर्मपत्नी हैं। सम्मान समारोह में एम.एस. राणा, दलवीर सिंह रावत, संजीव चौधरी, शशांक शर्मा, अनुज भारद्वाज और डी.के. शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



