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तंगी से लड़ी लड़ाई, पिता का साया छूटा, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत… यश ठाकुर ने ऐसे तय किया भारतीय टीम तक का सफर

तंगी से लड़ी लड़ाई, पिता का साया छूटा, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत… यश ठाकुर ने ऐसे तय किया भारतीय टीम तक का सफर

मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। घर में सभी भावुक हैं। यह मेरे परिवार का सपना था जो आज पूरा हो गया : यश  ठाकुर 

नई दिल्ली। विदर्भ के तेज गेंदबाज यश ठाकुर जब जिम्बाब्वे के आगामी दौरे पर भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में कदम रखेंगे, तो उनके कंधों पर सिर्फ देश की जर्सी नहीं, बल्कि एक पिता का वो अधूरा सपना भी होगा जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने सालों तक मैदान पर पसीना बहाया है। नागपुर हवाई अड्डे पर अपना सामान लेने का इंतजार कर रहे 27 वर्षीय यश को जब भारतीय टीम में चयन का फोन आया, तो उनकी आंखें नम हो गईं। दुर्भाग्य से, जिस बेटे को टीम इंडिया की जर्सी में देखने की जिद उनके पिता ने पाल रखी थी, वो आज इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए दुनिया में नहीं हैं। लेकिन यश ने हार नहीं मानी और घरेलू क्रिकेट की लंबी तपस्या के बाद आखिरकार नीली जर्सी का टिकट हासिल कर लिया। भारत की यह टीम 23 से 26 जुलाई तक जिम्बाब्वे में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी।

यश के जीवन का सबसे कठिन साल 2023 रहा जब पिता रविसिंह ठाकुर का अचानक निधन हो गया

यश ठाकुर का भारतीय टीम तक का सफर आसान नहीं रहा। एक मध्यमवर्गीय व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखने वाले यश को वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके माता-पिता ने कभी उनके सपनों के आगे तंगी को नहीं आने दिया। यश के जीवन का सबसे कठिन दौर साल 2023 में आया, जब दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता रविसिंह ठाकुर का अचानक निधन हो गया।इस दुखद घटना ने यश को भीतर तक झकझोर दिया था। यश बताते हैं, वह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था। मुझे इस क्षति से उबरने में काफी समय लगा। लेकिन मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि चाहे कुछ भी हो जाए, मुझे अपने सपने को नहीं भूलना है। उनके इन्हीं शब्दों ने मुझे टूटने नहीं दिया। पिता के जाने के बाद मां काजल और बड़ी बहन ने यश का हौसला बढ़ाया और उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

अनुभव से लैस हैं यश ठाकुर

श्रीलंका के भारत ‘ए’ दौरे से ठीक बाद सीनियर टीम में चुने गए यश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवहीन कहना गलत होगा। वह भारतीय क्रिकेट के घरेलू ढांचे की मजबूत उपज हैं। 2017 में लिस्ट ए क्रिकेट से शुरुआत करने वाले यश 57 मैचों में करीब 100 विकेट चटका चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 74 टी20 मैच खेले हैं, जिसमें लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) समेत दो अलग-अलग आईपीएल फ्रेंचाइजी के लिए खेले गए 22 मैच भी शामिल हैं। लखनऊ की टीम में रहते हुए उन्हें भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल के साथ काम करने का लंबा अनुभव मिला है, जो इस दौरे पर उनके काफी काम आएगा।

रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, ईरानी कप और विजय हजारे ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर ही बीसीसीआई ने उन्हें संभावित तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल किया था। शुभमन गिल के साथ अंडर-19 के दिनों में इंग्लैंड का दौरा करने वाले यश को तब विश्व कप टीम में जगह नहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय भारत ‘ए’ के मौकों को भुनाया और आज अपनी मंजिल हासिल कर ली। यश का कहना है, मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। घर में सभी भावुक हैं। यह मेरे परिवार का सपना था जो आज पूरा हो गया।

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