धरना स्थल पहुंचने से पहले कांग्रेस नेताओं की हिरासत पर राजनीतिक घमासान

- शांतिपूर्ण विरोध को रोकना लोकतंत्र के खिलाफ : प्रदीप रावत
- जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा, कांग्रेस का ऐलान
पायनियर समाचार सेवा। उत्तरकाशी। मोदी सरकार के 25 वर्ष के कार्यकाल तथा राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में प्रस्तावित कांग्रेस के एक दिवसीय धरना कार्यक्रम से पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकतार्ओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप सिंह रावत ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। प्रदीप रावत ने जारी बयान में कहा कि वह हनुमान चौक पर आयोजित शांतिपूर्ण धरने में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें उनके आवास से हिरासत में लेकर पुलिस लाइन में बैठा दिया। उनके साथ कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कार्यकतार्ओं को भी पुलिस लाइन ले जाया गया। उन्होंने कहा कि बिना किसी कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे लोगों को रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि हाल ही में दिल्ली में भी विपक्षी नेताओं को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। उत्तरकाशी में हुई कार्रवाई से यह सवाल और गंभीर हो गया है कि सरकार जनता और विपक्ष की आवाज सुनने के बजाय उसे रोकने का प्रयास क्यों कर रही है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं, जर्जर सड़कों, जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक, आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं, आशा कार्यकतार्ओं, भोजनमाताओं, कर्मचारियों, किसानों, युवाओं और व्यापारियों से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगा। रावत ने कहा कि जनता की समस्याओं को पुलिस बल के सहारे दबाया नहीं जा सकता और कांग्रेस लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से जनहित के मुद्दे उठाती रहेगी। प्रदीप रावत ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता जनता के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। घटना के बाद जिले की राजनीतिक गतिविधियों में भी चर्चा का माहौल बना हुआ है।



