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उत्तराखंड में सड़क हादसों पर नहीं लग रहा ब्रेक, सात माह में 775 मौतें

उत्तराखंड में सड़क हादसों पर नहीं लग रहा ब्रेक, सात माह में 775 मौतें

पायनियर समाचार सेवा। देहरादून। उत्तराखंड में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर उनमें सुधार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हादसों और इनमें होने वाली मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। वर्ष 2026 में जुलाई तक प्रदेश में 1,272 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 775 लोगों की मौत हुई, जबकि 1,341 लोग घायल हुए। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर महीने औसतन 110 से अधिक लोगों की सड़क हादसों में जान जा रही है। पिछले वर्षों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश में 1,846 सड़क दुर्घटनाओं में 1,242 लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार के बावजूद हादसों में अपेक्षित कमी नहीं आना परिवहन और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
2,559 दुर्घटना संभावित क्षेत्र चिन्हित
उत्तराखंड परिवहन विभाग ने प्रदेशभर में 2,559 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें से 2,140 स्थानों पर सुधार कार्य किया जा चुका है, जबकि 419 स्थानों पर सुधार कार्य अभी बाकी है। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। राजधानी देहरादून का मोहब्बेवाला क्षेत्र सड़क हादसों के लिहाज से चिंता का नया केंद्र बनकर सामने आया है। बीते नौ महीनों में यहां नौ बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं। इन दुर्घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। लगातार हादसों के बावजूद क्षेत्र में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों की माने तो प्रदेश में सड़क हादसों के पीछे प्रमुख कारणों में रैश ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग शामिल हैं। तेज गति से वाहन चलाने के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण कम हो जाता है और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार के साथ-साथ वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। शैलेश कुमार तिवारी, उप परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड के अनुसार, प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। औसतन हर वर्ष करीब दो हजार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें करीब 1,200 लोगों की मौत होती है। रैश ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में सामने आए हैं।

प्रदेश में पिछले कुछ सालों से सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। हर प्रदेश में करीब दो हजार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिसमें करीब 1200 लोगों की मौत हो रही हैं। सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य रूप से रेश ड्राइविंग और ओवर स्पीडिंग पाया गया है. रेश ड्राइविंग में दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है. इसी तरह ओवर स्पीडिंग भी सड़क हादसों का बड़ा कारण बनती है।
-शैलेश कुमार तिवारी, उप परिवहन आयुक्त उत्तराखंड
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