उत्तराखंड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का धरना, सात मांगों पर कार्रवाई की मांग

लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
हरिद्वार। उत्तराखंड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ ने लंबित मांगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को जिला मुख्यालय रोशनाबाद में एक दिवसीय धरना दिया। कर्मचारियों ने जिला कार्यालय के साथ तहसील कार्यालयों में भी धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मांगों के निस्तारण की मांग उठाई गई।
संघ के जिला सचिव शशांक कश्यप के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में हरिद्वार, रुड़की, लक्सर, भगवानपुर और अन्य तहसील क्षेत्रों के कर्मचारियों ने भाग लिया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। इन पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है। संघ ने वर्ष 2005 से लंबित कलेक्ट्रेट ढांचे के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी करने, कलेक्ट्रेट को विशेष कार्यालय या विभाग का दर्जा देने और कनिष्ठ सहायक से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक के वेतनमान संशोधित करने की मांग की।
इसके अलावा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को तहसीलदार के लोक लेखा अधिकारी की वित्तीय शक्तियां देने, नायब तहसीलदार के पदों पर पदोन्नति के लिए कलेक्ट्रेट संवर्ग से 10 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने तथा वरिष्ठ और मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के रिक्त पदों पर समय से पदोन्नति करने की मांग उठाई गई। कर्मचारियों ने पारस्परिक और निजी अनुरोध के आधार पर लंबित स्थानांतरण प्रार्थना पत्रों का जल्द निस्तारण करने की मांग भी रखी। संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर शासन स्तर से शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।




