UP Cyber Crime: 84 हजार जागरूकता अभियान से साइबर ठगी के खिलाफ मजबूत हुआ डिजिटल सुरक्षा कवच

लखनऊ, 03 अक्टूबर। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी, फर्जी अप्रूवल, म्यूल अकाउंट और एआई-डीपफेक जैसे तरीकों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
प्रदेश में अब तक 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव आयोजित किए गए हैं। इन अभियानों के जरिये लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता जांचने, संदिग्ध लिंक से बचने और ऑनलाइन लेनदेन में सावधानी बरतने की जानकारी दी जा रही है।
सिनेमा हॉल से रेलवे स्टेशन तक जागरूकता
साइबर जागरूकता अभियानों को केवल पुलिस कार्यालयों या थानों तक सीमित नहीं रखा गया है। सिनेमा हॉल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अभियानों में लोगों को बताया जा रहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध वेबसाइट पर बैंकिंग जानकारी दर्ज करने या फर्जी अप्रूवल के नाम पर भुगतान करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूरी है।
ठगी के बाद पहला घंटा बेहद अहम
साइबर फ्रॉड होने के बाद पीड़ित के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय शुरुआती एक घंटा माना जा रहा है। एसपी साइबर क्राइम राजेश यादव ने बताया कि जल्द शिकायत मिलने पर रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके लिए पीड़ित को ठगी का पता चलते ही 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। देरी होने पर अपराधी रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे उसे रोकने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर बना अहम कड़ी
उत्तर प्रदेश में साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर के जरिये ठगी की रकम को रोकने के लिए रियल टाइम रूटिंग और डेटा शेयरिंग की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित बैंक के साथ समन्वय कर रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
सितंबर में प्रदेश में साइबर फ्रॉड की रकम फ्रीज कराने की दर 34 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 31 प्रतिशत बताया गया है। यह व्यवस्था ठगी के बाद धनराशि को तेजी से दूसरे खातों में जाने से रोकने के प्रयास का हिस्सा है।
बदलते साइबर अपराध के साथ पुलिस की तैयारी
साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए पुलिस कर्मियों को अत्याधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है। एआई-डीपफेक और म्यूल अकाउंट जैसे नए खतरों से निपटने के लिए साइबर पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर है।
प्रदेश के थानों में साइबर हेल्प डेस्क के साथ लखनऊ में 1930 कॉल सेंटर और साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इससे शिकायत मिलने के बाद बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय कर त्वरित कार्रवाई का प्रयास किया जा रहा है।
समाज की भागीदारी से मजबूत होगी साइबर सुरक्षा
साइबर अपराध से मुकाबला केवल पुलिस या बैंकिंग संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, यूथ एवं स्पोर्ट्स क्लब और स्थानीय संगठनों को भी जागरूकता अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल सुरक्षा में सबसे अहम भूमिका सतर्कता और समय पर शिकायत की है। संदिग्ध डिजिटल गतिविधि सामने आने पर तुरंत कार्रवाई और सही जानकारी साझा करने से साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।



