खबर का असर: लंबे समय बाद जागा सिस्टम, अधूरी छोड़ी गई चार पुलियों का निर्माण शुरू
शहर के मोहल्ला डालचंद में नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला आखिरकार सुर्खियां बनने के बाद हरकत में आया। सड़क निर्माण के दौरान चार पुलियों का काम अधूरा छोड़कर गायब हुए ठेकेदार ने लंबे समय बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया है। मामले के उजागर होने के बाद नगर पालिका प्रशासन भी बैकफुट पर नजर आया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल निर्माण शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मोहल्ला डालचंद में नगर पालिका परिषद की ओर से सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा था। निर्माण के दौरान ठेकेदार ने चार पुलियों की खुदाई कर उन्हें अधूरा छोड़ दिया और लंबे समय तक मौके पर पुलियों का निर्माण नहीं कराया गया । परिणामस्वरूप सड़क पर बने गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए। दोपहिया वाहन चालक हर दिन दुर्घटना के खतरे के बीच गुजरने को मजबूर रहे, जबकि चार पहिया वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती रही।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब दो महीने बाद भी सड़क का निर्माण कार्य पूरी तरह नहीं हो पाया , लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो मौके का निरीक्षण किया और न ही ठेकेदार पर काम पूरा कराने का दबाव बनाया। इससे नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था और निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल उठने लगे।
मामले की जानकारी लेने पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संजीव कुमार ने पहले सिर्फ इतना कहा था कि वह निर्माण कार्य की जानकारी कर रहे हैं। उनका यह जवाब भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, क्योंकि इतने लंबे समय से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य अधिकारियों की जानकारी में नहीं होना खुद प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
मामला मीडिया में प्रमुखता से सामने आने के बाद स्थिति बदलती दिखाई दी। शनिवार को ठेकेदार ने अधूरी छोड़ी गई चारों पुलियों का निर्माण कार्य दोबारा शुरू करा दिया। इससे लोगों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही सड़क और पुलियों का निर्माण पूरा हो सकेगा और आवागमन सामान्य हो जाएगा।
हालांकि मोहल्लेवासियों का कहना है कि केवल काम शुरू होना ही पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि दो महीने तक लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही नगर पालिका को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद अब तक किसी अधिकारी या ठेकेदार की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई। लोगों ने मांग की है कि भविष्य में निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परियोजना को अधूरा छोड़कर जनता को परेशानी न उठानी पड़े।










