यंग इंडिया पार्लियामेंट-2026
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए राजनीति में शिक्षित, जागरूक और उत्तरदायी युवाओं का आगे आना अत्यंत आवश्यक है। सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। दोनों की अपनी-अपनी भूमिका है और सभी के विचार समान नहीं हो सकते। स्वस्थ लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवाद और संसदीय मर्यादा सर्वोपरि होनी चाहिए।
महाना भारतीय उद्योग परिसंघ की युवा इकाई यंग इंडियंस द्वारा आयोजित यंग इंडिया पार्लियामेंट-2026, कानपुर चैप्टर के उद्घाटन करने के उपरांत प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा पूर्णत: पेपरलेस हो चुकी है और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कार्य संचालित कर रही है। सदन में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। अध्यक्ष की अनुमति के बिना कोई भी सदस्य अपनी बात नहीं रख सकता। विधानसभा में उदारता और सख्ती—दोनों का संतुलित समावेश है, जिससे सदन की गरिमा और कार्यक्षमता बनी रहती है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आम धारणा के विपरीत विधानसभा का कार्य केवल सत्र के दौरान ही नहीं होता, बल्कि सत्र समाप्त होने के बाद भी विभिन्न समितियों, प्रशासनिक गतिविधियों तथा अन्य संसदीय कार्यों के माध्यम से निरंतर चलता रहता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात सदन के भीतर प्रभावी ढंग से रखनी चाहिए। सदन में व्यक्त किए गए विचार जनता तक पहुँचते हैं, जबकि केवल वॉकआउट करने से जनता तक संदेश प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाता। आज का मतदाता अपने विधायक का प्रदर्शन देखना चाहता है, केवल शोर-शराबा नहीं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का संचालन भी वास्तविक विधानसभा की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया गया। इसमें प्रश्नकाल, शून्यकाल तथा विधायी कार्यवाही का संचालन हुआ और विधेयक भी पारित किए गए। महाना ने प्रतिभागियों से कहा कि यंग इंडिया पार्लियामेंट जैसे मंच युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं और उत्तरदायी नेतृत्व को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में नेतृत्व क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल अगले पांच वर्षों के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाते हैं।
हमें भी वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं और आने वाले वर्षों के अनुरूप सोच विकसित करनी चाहिए। कार्यक्रम में 17 विद्यालयों के 150 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। उन्होंने प्रश्नकाल, शून्यकाल तथा विधायी प्रक्रिया का प्रभावी निर्वहन करते हुए संसदीय कार्यवाही का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सीआईआई यंग इंडियंस के नेशनल वाइस चेयर अनुज अग्रवाल, कानपुर चैप्टर के चेयर संचित अग्रवाल, को-चेयर यश अग्रवाल तथा सीआईआई उत्तर प्रदेश के निदेशक एवं स्टेट हेड आलोक शुक्ला राधिका, रचित, कुश तिवारी, साक्षी, पलक आदित्य सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं युवा प्रतिभागी उपस्थित रहे।
चार महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक बहस, बहुमत से पारित हुए सभी प्रस्ताव
भारतीय उद्योग परिसंघ की युवा इकाई यंग इंडियंस कानपुर द्वारा आयोजित यंग इंडिया पार्लियामेंट-2026 में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का प्रभावशाली एवं जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सत्ता पक्ष, विपक्ष, मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष की भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए संसदीय कार्यवाही का वास्तविक अनुभव प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विधेयक, एथेनॉल ब्लेंडिंग विधेयक, राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति एवं मानव तस्करी डिजिटल एकीकरण विधेयक तथा डिजिटल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण विधेयक सदन में प्रस्तुत किए गए। इन विधेयकों को क्रमश: आरना, अंशुमान, परी और वैभवी ने सदन के पटल पर रखा। प्रत्येक विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच गंभीर एवं सार्थक बहस हुई। प्रतिभागियों ने सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर अपने-अपने तर्क रखते हुए विधेयकों के समर्थन और विरोध में तथ्यपरक विचार व्यक्त किए। प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही के बाद सदन में विधायी प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रत्येक विधेयक पर मतदान कराया गया।
मतदान के दौरान सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के सदस्यों ने अपने मत के समर्थन अथवा विरोध में हाथ उठाकर अपनी सहमति और असहमति दर्ज कराई। बहुमत का समर्थन मिलने पर सभी चारों विधेयक पारित घोषित किए गए। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों, तार्किक विमर्श, निर्णय प्रक्रिया तथा स्वस्थ बहस की संस्कृति का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का प्रभावी पालन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को विधानसभा की वास्तविक कार्यप्रणाली को निकट से समझने का अवसर मिला।
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