सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर 50 से अधिक गांवों की पदयात्रा

- 20 अक्टूबर को सीएम आवास कूच
- ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के साथ देहरादून रवाना हुए ग्रामीण
- 2027 के विधानसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
देहरादून । सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने की मांग को लेकर क्षेत्रीय जनता का आंदोलन तेज हो गया है। लंबे समय से लंबित मांग पूरी नहीं होने से नाराज 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने अब देहरादून तक पदयात्रा शुरू कर दी है। सिमली अस्पताल संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण 12 अक्टूबर को देहरादून के लिए रवाना हुए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित करने की मांग पूरी नहीं हुई तो वे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। ग्रामीण पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मांगों से संबंधित बैनरों के साथ ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। आंदोलनकारियों का लक्ष्य करीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर 20 अक्टूबर को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करना है।
12 साल बाद भी पूरी तरह संचालित नहीं हुआ अस्पताल
सिमली में करीब 12 वर्ष पहले बने महिला अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने और सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल अभी तक पूरी तरह संचालित नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा मिलने से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी और मरीजों को राहत मिलेगी। सिमली अस्पताल संघर्ष समिति के संयोजक देवेंद्र सिंह ने कहा कि अस्पताल के लिए ग्रामीण लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान मांग की ओर आकर्षित करने के लिए क्षेत्र की जनता ने देहरादून तक पदयात्रा करने का निर्णय लिया है। जब तक अस्पताल को पूरी तरह संचालित करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी शासनादेश का इंतजार
संघर्ष समिति के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 नवंबर 2024 को गैरसैंण में सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने की घोषणा की थी। हालांकि, समिति का आरोप है कि घोषणा के बावजूद अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने देहरादून कूच करने का निर्णय लिया है।
रुद्रप्रयाग होते हुए श्रीनगर पहुंचेंगे आंदोलनकारी
पदयात्रा में शामिल ग्रामीण प्रतिदिन करीब 30 से 40 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार शाम तक आंदोलनकारियों के रुद्रप्रयाग पहुंचने और मंगलवार को श्रीनगर में रुकने की योजना है। इसके बाद पदयात्रा आगे बढ़ेगी और 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास कूच किया जाएगा। संघर्ष समिति ने देहरादून में रह रहे चमोली जिले के लोगों से भी इस आंदोलन में शामिल होकर सहयोग देने की अपील की है।



