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बुखार की दवा तक नहीं, बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर मरीज
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चर्म रोग, डायबिटीज, मूत्र विकार समेत कई जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं
पायनियर समाचार सेवा। चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मॉडल जिले की परिकल्पना के बीच चम्पावत में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लक्ष्मी बाजार स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीज तो पहुंच रहे हैं, लेकिन कई जरूरी दवाओं की कमी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि चिकित्सालय में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कई बार बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं या फिर एलोपैथिक चिकित्सा की ओर रुख करना पड़ता है। वर्तमान में क्षेत्र में वायरल फीवर के मामले सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं, लेकिन चिकित्सालय में बुखार से संबंधित जरूरी दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा चर्म रोग, डायबिटीज, मूत्र विकार, वैरिकोज वेन्स, बच्चों की दवाएं, लिवर संबंधी दवाएं और पाचन से जुड़ी कई आयुर्वेदिक दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। चिकित्सालय में आसवों में फिलहाल अभयारिष्ट की उपलब्धता बताई जा रही है, जबकि चूर्ण की सप्लाई अपेक्षाकृत अधिक होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या दवाओं की सप्लाई मरीजों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से हो रही है या फिर ऊपर से तय मात्रा में दवाएं भेजी जा रही हैं? वहीं चिकित्सालय की युवा चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन कनौजिया मरीजों को आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक कर रही हैं। लेकिन दवाओं की सीमित उपलब्धता उनके सामने भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मामले को लेकर आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ. आरपी सिंह से संपर्क किया गया। उन्होंने माना कि दवाओं की उपलब्धता की प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दो महीने के भीतर चिकित्सालय में सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि विभाग का यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है और मरीजों को जरूरी आयुर्वेदिक दवाएं कब तक उपलब्ध हो पाती हैं।
चिकित्सालय जाने का रास्ता भी बना मुसीबत
दवाओं की कमी के साथ ही आयुर्वेदिक चिकित्सालय तक पहुंचने का रास्ता भी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। मार्ग में काई जमने से रास्ता बेहद फिसलन भरा हो गया है। बताया जा रहा है कि कई मरीज यहां फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। बुजुर्ग और बीमार मरीजों के लिए यह रास्ता किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय लोगों ने मार्ग पर तत्काल जूट की चटाई या फिसलन रोकने की व्यवस्था किए जाने की मांग की है, ताकि मरीज सुरक्षित तरीके से चिकित्सालय तक पहुंच सकें।