-
सड़क हादसों की रोकथाम का एक्शन प्लान
-
दुर्घटनाओं के मूल कारणों की वैज्ञानिक पहचान व प्रभावी निराकरण पर विशेष बल
-
पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यशाला में रखे गए सुझाव, दिशा निर्देश जारी
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से संचालित जीरो फटालिटी डिस्ट्रिक्ट योजना को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए सोमवार को पुलिस मुख्यालय, लखनऊ स्थित अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन यातायात निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया। कार्यशाला में जेडएफडी कार्यक्रम के तृतीय एवं चतुर्थ चरण के अंतर्गत प्रदेश के 59 जनपदों के सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य 213 चिन्हित क्रिटिकल स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी अधिकारियों एवं जेडएफडी नोडल अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यशाला के दौरान डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपने सम्बोधन में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल आकस्मिक घटना मानने के बजाय उनके पीछे मौजूद कारणों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कर उनके निराकरण के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय एवं निरंतर अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाए।

डीजीपी ने क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारियों को अपने-अपने एरिया ऑफ रिस्पांसिबिलिटी में दुर्घटना संभावित स्थलों एवं उनके कारकों की पहचान कर प्रभावी रोकथाम की कार्यवाही मिशन मोड में संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना रोकथाम एवं दुर्घटना की विवेचना दोनों ही विशेषज्ञता वाले कार्य हैं, जिनमें तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। संबंधित विभागों से अपेक्षित सुधारात्मक कार्यों को निरंतर फॉलोअप एवं उच्च स्तर पर एस्केलेट करते हुए पूर्ण कराया जाए।
इसके अलावा कहा कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीम का दायित्व केवल दुर्घटना के बाद की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसके कारणों की समीक्षा करते हुए यह चिन्हित किया जाए कि व्यवस्था में कौन-सी कमी के कारण दुर्घटना हुई और भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या सुधार आवश्यक हैं। इसके लिए आवश्यक प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा उपाय एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। डीजीपी ने कहा कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रक्रिया का सही एवं निरंतर अनुपालन सबसे महत्वपूर्ण है। क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों द्वारा चिन्हित समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय एवं अनुश्रवण किया जाए।
उन्होंने क्रिटिकल कॉरिडोर टीम के कार्य को विशेषीकृत पुलिसिंग का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए टीम प्रभारियों से अपने-अपने क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता एवं उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित प्रिवेंशन एवं इन्वेस्टिगेशन में विशेषज्ञता विकसित करने, आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी प्राप्त करने तथा उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने पर भी विशेष बल दिया गया। साथ ही, क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के कार्य एवं उनके परिणामों को भविष्य में पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता एवं करियर प्रोग्रेशन के महत्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित किए जाने की बात कही गई।
डीजीपी ने क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम, प्रभावी प्रवर्तन, दुर्घटना विश्लेषण तथा प्राथमिक उपचार एवं सीपीआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षित किए जाने पर भी जोर दिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने दिए गए सुझावों का भी पुलिस महानिदेशक द्वारा संज्ञान लिया। उन्होंने अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात को निर्देशित किया कि प्राप्त सुझावों का समुचित परीक्षण कर आवश्यकतानुसार उन्हें यातायात से संबंधित आगामी पॉलिसी में सम्मिलित किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की प्रभावी रोकथाम एवं सड़क सुरक्षा के प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान मयंक ज्योति, अपर परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश एवं केएस इमैन्युअल पुलिस महानिरीक्षक/पुलिस महानिदेशक के जीएसओ सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहें।