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मानेश्वर धाम में 6.30 फीट ऊंचा कलश स्थापित

पार्वतीय शैली में संवरा ढाई हजार साल पुराना मंदिर। पायनियर समाचार सेवा। चंपावत। चंपावत-लोहाघाट के मध्य स्थित प्रसिद्ध मानेश्वर धाम में शनिवार को धार्मिक आस्था और परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला। करीब ढाई हजार वर्ष पुराने मंदिर के पार्वतीय शैली…

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मानेश्वर धाम में 6.30 फीट ऊंचा कलश स्थापित
  • पार्वतीय शैली में संवरा ढाई हजार साल पुराना मंदिर।

पायनियर समाचार सेवा। चंपावत। चंपावत-लोहाघाट के मध्य स्थित प्रसिद्ध मानेश्वर धाम में शनिवार को धार्मिक आस्था और परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला। करीब ढाई हजार वर्ष पुराने मंदिर के पार्वतीय शैली में जीर्णोद्धार के बाद मंदिर के शिखर पर 6.30 फीट ऊंचे कलश की विधिवत स्थापना की गई।
कलश का निर्माण धर्मराज पुरी महाराज ने विशेष रूप से काशी में तैयार कराया है। शनिवार को पंडित गिरीश कॉलोनी और पंडित बृजेश रसियारा ने पूर्ण विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना एवं रुद्राभिषेक के बाद कलश की स्थापना कराई। कलश स्थापित होते ही मंदिर परिसर धार्मिक जयघोष से गूंज उठा।
धर्मराज पुरी महाराज के मानेश्वर धाम में आगमन के बाद मंदिर और धाम के कायाकल्प का सिलसिला शुरू हुआ है। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर को पार्वतीय स्थापत्य शैली में नया स्वरूप दिया गया है, जिससे धाम की भव्यता और धार्मिक आकर्षण और बढ़ गया है। इस अवसर पर भगवान योगीराज श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव भी विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। महाराजश्री ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को चंद्रोदय के समय रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी कारण सन्यासी और गृहस्थ श्रद्धालु इस पर्व को पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने अधर्म और पाप के संहार के लिए श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया था। जन्माष्टमी देश-विदेश में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है, लेकिन भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा सभी जगह समान है। कलश स्थापना और धार्मिक आयोजन में लोहाघाट, चंपावत, खूना, बोरा, कुलेठी, चक्कू समेत आसपास के अनेक गांवों से श्रद्धालु पहुंचे।