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फूलों की घाटी में सैलानियों की रिकॉर्ड आमद, अब तक पहुंचे 22 हजार पर्यटक

पायनियर समाचार सेवा। ज्योतिर्मठ। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों देशी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार है। अगस्त माह के पीक सीजन में घाटी में पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद दर्ज की गई है। अब तक करीब 22 हजार सैलानी…

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फूलों की घाटी में सैलानियों की रिकॉर्ड आमद, अब तक पहुंचे 22 हजार पर्यटक

पायनियर समाचार सेवा। ज्योतिर्मठ। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों देशी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार है। अगस्त माह के पीक सीजन में घाटी में पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद दर्ज की गई है। अब तक करीब 22 हजार सैलानी फूलों की घाटी का दीदार कर चुके हैं, जो वर्ष 2025 की तुलना में करीब डेढ़ गुना अधिक है। अभी पर्यटकों के लिए घाटी 31 अक्टूबर तक खुली है। अगस्त के तीन सप्ताह में फूलों की घाटी में यूरोपीय देशों के साथ ही जापान, थाईलैंड और कोरिया से बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी पहुंचे। इन दिनों घाटी में रंग-बिरंगे अल्पाइन पुष्पों की मनमोहक छटा पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।

रिवर व्यू प्वाइंट तक गुलाबी हिमालयी बालसम और फूलों की बड़ी-बड़ी क्यारियां घाटी की खूबसूरती में चार चांद लगा रही हैं। वहीं नीले कैंपान्यूला, जिरेनियम, पीले कॉरिडेल्स और साइलिन आर्किड जैसे पुष्पों की खुशबू पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क ज्योतिर्मठ के उप वन संरक्षक यश ढोबले ने बताया कि फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों के लिए खोली गई थी। अब तक करीब 22 हजार पर्यटक घाटी पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वन विभाग की ओर से घाटी में कई व्यवस्थागत हस्तक्षेप किए गए हैं, जिसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। फूलों की घाटी प्रत्येक वर्ष एक जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। इसके बाद शीतकाल में घाटी बर्फ से ढक जाती है। यह क्षेत्र पुष्प जैव विविधता के साथ-साथ दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी है। प्राकृतिक रंगों से सजे दुर्लभ पुष्प और वन्यजीवन इसे देश-विदेश के पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनाते हैं।