पायनियर समाचार सेवा
गाजियाबाद। मेरठ रोड पर कांवड़ शिविर जगह-जगह तैयार हो गए हैं। हरिद्वार से कांवड़ियां जल लेकर आने लगे हैं। भगवान आशुतोष के जयकारों के साथ कांवड़ियां गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। शुक्रवार से जीटी रोड और मेरठ रोड पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगेगी। गंगनहर पटरी और पाइप लाइन मार्ग पर हरिद्वार से कांवड़ लाने वालों की संख्या रोजाना बढ़ रही है। मेरठ रोड पर भी कावड़ियां जल लेकर आ रहे हैं। मेरठ रोड, गंगनहर पटरी और पाइप लाइन मार्ग केसरिया रंग में रंगने लगे हैं। जनपद से हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की तरफ जाने वाले कांवड़ियां निकल रहे हैं।

भगवान भोले के जयकारों के साथ कांवड़ियां आगे बढ़ रहे हैं। इस तरह मेरठ रोड शिव की भक्ति में तब्दील होने लगी है। कांवड़ियों के विश्राम और प्रसाद के लिए जगह-जगह शिविर लगा गए हैं। कांवड़ियां सुविधा के हिसाब से शिविर में ठहरकर आराम कर रहे हैं। अंबिका सेवा समिति ने मेरठ रोड पटेलनगर में कांवड़ शिविर का उद्घाटन किया। इसके अलावा मोदीनगर, मुरादनगर, दुहाई आदि स्थानों पर कांवड़ शिविर लग गए हैं। शुक्रवार से हरिद्वार से आने वाले कांवड़ियों की संख्या में इजाफा होने लगेगा।
व्हीलचेयर के सहारे 30 वर्ष से गंगाजल ला रहे
अगर इंसान मन में कुछ करने की ठान ले, तो कोई भी परेशानी उसे रोक नहीं सकती। दिल्ली के रहने वाले 66 वर्षीय राजेश सचदेवा इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं। एक पैर से चलने में दिक्कत होने के बावजूद वह पिछले 30 साल से हर साल व्हीलचेयर के सहारे हरिद्वार जाते हैं। करीब 500 किलोमीटर का सफर तय कर वहां से गंगाजल लाते और भगवान शिव का जलाभिषेक कर भोले के प्रति अपने श्रद्धा जाहिर करते है।दिल्ली के रोहिनी सेक्टर-20 निवासी राजेश सचदेवा की कहानी उन लोगों के लिए बड़ी सीख है, जो किसी हादसे या बीमारी के बाद हिम्मत हार जाते हैं। राजेश ने बताया कि भगवान भोलेनाथ पर उनका पूरा विश्वास है। यही विश्वास उन्हें हर साल इतनी लंबी और मुश्किल यात्रा करने की ताकत देता है। यात्रा के दौरान उन्हें खराब रास्तों, तेज धूप, बारिश और थकान जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फिर भी वह कभी हार नहीं मानते। राजेश सचदेवा का कहना है कि सच्ची श्रद्धा और मजबूत हिम्मत हो तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। उनकी 30 साल की यह यात्रा लोगों को यही संदेश देती है कि अगर मन मजबूत हो, तो हर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।


परिवार की सुख-शांति के लिए कांवड़ उठा रही महिलाएं
कांवड़ यात्रा अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रही। बड़ी संख्या में महिलाएं भी भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रही हैं। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ यह कठिन यात्रा पूरी कर रही हैं। दिल्ली के महिपालपुर निवासी 70 वर्षीय बीमा शर्मा भी इस बार पूरे उत्साह के साथ कांवड़ यात्रा कर रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जोश युवाओं से अधिक बना हुआ है। जीटी रोड से कांवड़ लेकर गुजरते हुए उन्होंने बताया कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही उन्हें यह यात्रा पूरी करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि साल 1990 में उनके पति हरीशंकर शर्मा को गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया था। जिसके बाद परिवार की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। पति के स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार की मन्नत से सन 1990 में पहली बार कांवड़ उठाई थी। इसके बाद से इसे परंपरा के रूप में अपना लिया। उन्होंने बताया की दो साल पहले पति का स्वर्गवास हो गया। लेकिन परंपरा अभी भी जारी है और आगे बच्चे इसे जारी रखेंगे। परिवार की खुशहाली और सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना लेकर पांच लीटर गंगाजल हरिद्वार से लाई है और गंतव्य पर पहुंच भोले का जलाभिषेक करेंगी। उनके साथ यात्रा कर रहीं कंचन शर्मा ने बताया कि सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। उनका मानना है कि सच्चे मन से की गई पूजा और जलाभिषेक से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में थकान जरूर होती है, लेकिन भोलेनाथ का नाम लेते ही सारी परेशानी दूर हो जाती है।











