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मदरसे जाते समय काल बनी जर्जर दीवार, सगे बहन-भाई समेत दो मासूमों की मौत

रामसनेहीघाट बाराबंकी। गुलचप्पा गांव में गुरुवार सुबह हुआ हादसा सिर्फ दो मासूम बच्चों की मौत नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों और उम्मीदों के हमेशा के लिए बिखर जाने की कहानी बन गया। चार वर्ष पहले बीमारी से पांच वर्षीय बेटे फैजान…

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मदरसे जाते समय काल बनी जर्जर दीवार, सगे बहन-भाई समेत दो मासूमों की मौत

रामसनेहीघाट बाराबंकी। गुलचप्पा गांव में गुरुवार सुबह हुआ हादसा सिर्फ दो मासूम बच्चों की मौत नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों और उम्मीदों के हमेशा के लिए बिखर जाने की कहानी बन गया। चार वर्ष पहले बीमारी से पांच वर्षीय बेटे फैजान को खोने वाले मुस्लिम ने किसी तरह अपने दुख पर काबू पाया था। छोटे बेटे हुजैफा का दिल का ऑपरेशन कराकर उसे नई जिंदगी दी थी लेकिन गुरुवार की सुबह एक पक्की दीवार ने परिवार की बची-खुची खुशियां भी छीन लीं। सुबह रोज की तरह 14 वर्षीय हाजरा बानो अपने सात वर्षीय भाई हुजैफा का हाथ थामे मां के हाथ से बने पराठे और सब्जी का टिफिन लेकर मदरसे के लिए निकली थी। उनके साथ गांव के तीन अन्य बच्चे भी थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही कदम आगे मौत उनका इंतजार कर रही है। अचानक रास्ते में एक पक्की दीवार भरभराकर बच्चों के ऊपर गिर पड़ी। मलबे में दबे मासूमों की चीख सुनकर ग्रामीण दौड़े और उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हुजैफा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि हाजरा अस्पताल पहुंचते-पहुंचते जिंदगी की जंग हार गई । हादसे की खबर जैसे ही घर पहुंची, मां बदहवास होकर बेहोश हो गई। होश आने पर वह बार-बार बच्चों का नाम लेकर बिलख उठती और फिर बेसुध हो जाती। पिता मुस्लिम की सूनी आंखें मानो सब कुछ बयां कर रही थीं। पूरे गांव में मातम पसरा है और हर आंख इस परिवार के असहनीय दर्द को देखकर नम है। लोग बस यही कह रहे हैं कि इस परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

डीएम ने जताई संवेदना, तत्काल राहत के दिए निर्देश

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने गुलचप्पा की घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए उपजिलाधिकारी बृजेंद्र उपाध्याय से फोन पर जानकारी ली। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तत्काल राहत पहुंचाने तथा शासन के सभी प्रावधानों के तहत हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

नियमानुसार मिलेगी आर्थिक सहायता : एसडीएम

उपजिलाधिकारी बृजेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मासूम बच्चों की मौत से हुई क्षति की भरपाई किसी भी कीमत पर संभव नहीं है फिर भी शासनादेश के अनुसार आपदा राहत से मृत दोनों बच्चों के लिए कुल आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा हादसे में घायल तीनों बच्चों को भी नियमानुसार आर्थिक सहायता और आवश्यक उपचार की व्यवस्था कराई जाएगी।

राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने व्यक्त की शोक संवेदना

प्रदेश के खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री सतीश शर्मा ने गुलचप्पा की हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की असमय मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को शासन के नियमानुसार शीघ्र सहायता उपलब्ध कराई जाए।

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लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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