जैती महाविद्यालय में गढ़भोज की गूंज, पारंपरिक अनाजों से सजा उत्तराखंड की संस्कृति और सेहत का मंच

- पारंपरिक अनाजों की प्रदर्शनी, विद्यार्थियों ने जाना स्वास्थ्य और उद्यमिता का महत्व
पायनियर समाचार सेवा। जैती, अल्मोड़ा। श्री राम सिंह धौनी राजकीय महाविद्यालय जैती में गढ़भोज दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में ह्लस्वस्थ उत्तराखंड की ओर एक सशक्त कदमह्व विषय पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान एवं पारंपरिक अनाजों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्यान्नों, स्थानीय कृषि, संस्कृति, स्वास्थ्य और उद्यमिता के महत्व से परिचित कराना रहा। प्रभारी प्राचार्य डॉ. हेमलता ओली ने उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि एवं खान-पान के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. प्रेमा कैड़ा ने पारंपरिक अनाजों की उपयोगिता और पोषण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी। डॉ. रितेश टम्टा ने स्थानीय खाद्य परंपराओं और प्राचीन संस्कृति के संबंध को रेखांकित किया। डॉ. नेहा ने पारंपरिक अनाजों को बाजार से जोड़कर रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर विकसित करने की जानकारी दी, जबकि डॉ. पूनम ने पारंपरिक खान-पान और देवभूमि उद्यमिता योजना के संबंध में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों ने भी व्याख्यान के माध्यम से पारंपरिक खाद्यान्नों के महत्व पर अपने विचार रखे। योगाचार्य डॉ. संजय कुमार ने पारंपरिक अनाजों को संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इनके सेवन से पाचन स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में होने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने पारंपरिक खाद्य संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।कार्यक्रम के दौरान देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों ने मोटे अनाज, पारंपरिक खाद्य पदार्थ, ऐपण और स्थानीय सब्जियों आदि के स्टॉल लगाए। प्रदर्शनी के माध्यम से पारंपरिक खाद्य संस्कृति को स्वास्थ्य, स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवा उद्यमिता से जोड़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार जोशी ने किया। इस अवसर पर डॉ. राकेश बिष्ट, डॉ. रेखा जोशी, डॉ. विजयलक्ष्मी, डॉ. मनीषा, डॉ. जया राणा, डॉ. आरती सहित अन्य प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।



