चारधाम में 798 टन कचरा, हिमालयी पर्यावरण पर बढ़ा संकट

पायनियर समाचार सेवा। देहरादून। उत्तराखंड में पर्यटन और चारधाम यात्रा बढ़ने के साथ कचरे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। इस साल 27 सितंबर तक केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री से करीब 798 टन कचरा एकत्र किया गया। इसमें बदरीनाथ से 393 टन, केदारनाथ धाम व पैदल मार्ग से करीब 302 टन, गंगोत्री से 98 टन और यमुनोत्री से 4.85 टन प्लास्टिक कचरा शामिल है। बदरीनाथ में करीब 24 टन प्लास्टिक अलग किया गया, जिसमें पानी की बोतलों की संख्या अधिक रही। वहीं गंगोत्री में करीब 22 टन प्लास्टिक रिसाइकिल किया गया। हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान भी करीब 7 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक कचरा नदियों, जंगलों और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन रहा है। वन्यजीवों के शरीर में भी प्लास्टिक के अवशेष मिलने की बात सामने आई है। सरकार ने चारधाम यात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए वाटर एटीएम, आरओ प्लांट, प्लास्टिक कचरे के लिए मनी-बैक व्यवस्था और ड्रोन निगरानी जैसे उपाय शुरू किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कचरा उठाने के बजाय कचरा पैदा होने से रोकना और यात्रियों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।



