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बीकेटी की कठवारा पीएचसी बदहाल, टपकती छत के नीचे मरीजों का ईलाज 

बीकेटी की कठवारा पीएचसी बदहाल, टपकती छत के नीचे मरीजों का ईलाज 

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सुविधा पहुंचाने के  लाख दावे कर रही है। लेकिन राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब विकासखंड स्थित कठवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की बदहाल तस्वीर उन दावों फेल करता नज़र आ रहा है। मरीजों का उपचार करने वाला यह सरकारी अस्पताल खुद जर्जर होकर इलाज का इंतजार कर रहा है।  बरसात शुरू होते ही अस्पताल की छत छलनी हो जाती है, ओपीडी, डिस्पेंसरी, पैथोलॉजी, चिकित्सक कक्ष और दवा वितरण कक्ष में बारिश का पानी टपकने लगता है।

जिससे मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। करीब 27 वर्ष पूर्व इस शिवपुरी मार्ग पर स्थित इस अस्पताल का निर्माण लगभग सवा करोड रुपए की लागत से जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस इकाई द्वारा कराया गया था। जहां गत पांच दिसंबर 1999 को उद्घाटन के बाद यह अस्पताल आसपास के दर्जनों गांव की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना। लेकिन समय के साथ भवन जर्जर होता गया और जिम्मेदार विभाग मरम्मत के लिए अभी भी मौन धारण किए हुए है।

आज हालात यह है कि अस्पताल की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है,जगह-जगह दराडे पड़ गई हैं और दीवारों पर पेड़ पौधे तक उगे हैं बरसात के दौरान छत से लगातार पानी रिश्ता है,जिससे कमरों में पानी भर जाता है,मरीजों को भीगते हुए इलाज करना पड़ता है। जबकि डॉक्टर और कर्मचारी भी असुरक्षित माहौल में अपनी सेवाएं देने को मजबूर हैं,हर बारिश के साथ यह आशंका बनी रहती है कि कहीं जर्जर भवन का कोई हिस्सा भर-भराकर गिर न पड़े। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी केवल फाइलों मे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर दिखने में जुटे हैं।

जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है,राजधानी में स्थित अस्पताल की यह बदहाल स्थिति है तो दूरदराज के स्वास्थ्य केन्द्रो की दशा का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद अस्पताल की मरम्मत नहीं कराई गई,जिससे मरीजों की सुरक्षा पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। बीकेटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक प्रभारी डॉक्टर जेपी सिंह ने बताया कि कठवारा पीएचसी की जर्जर इमारत के संबंध में पिछले दो वर्षों के दौरान कई बार मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को पत्र भेजा गया भवन की मरम्मत के लिए शासन से बजट की मांग भी की गई।

लेकिन अब तक बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। राजधानी के इस सरकारी अस्पताल की  बदहाल स्थिति स्वास्थ विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है,जिस भवन में मरीजों को स्वस्थ करने का दायित्व निभाया जाता है,वहीं भवन आज खुद खस्ताहाल होकर खतरे की घंटी बज रहा है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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