अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर सेल्फी विद डॉटर पहल का डी एम ने दिया संदेश
अपनी बेटी वर्धन्या के साथ सेल्फी लेकर बालिकाओं के उत्थान का दिया सन्देश

श्रावस्ती। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 11 अक्टूबर को जनपद श्रावस्ती में बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा एवं सशक्तीकरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सेल्फी विद डॉटर पहल संचालित की जा रही है। जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग की पहल के माध्यम से समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, उन्हें समान अवसर प्रदान करने तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया जाएगा। जिसके तहत जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने अपनी बेटी वर्धन्या के साथ सेल्फी लेकर लोगों को प्रेरित किया। इसके साथ ही जिले के अन्य अधिकारियों क्रमश: जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, खंड शिक्षा अधिकारी सिरसिया, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सहित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारियों ने अपनी अपनी बेटियों के सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर साझा किया और बालिकाओं के उत्थान का संदेश दिया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस प्रत्येक वर्ष 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों को प्रोत्साहित करना तथा उनके सामने आने वाली सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक चुनौतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। जनपद श्रावस्ती में प्रस्तावित ‘सेल्फी विद डॉटर’ पहल के माध्यम से अभिभावकों एवं आमजन को अपनी बेटियों के साथ तस्वीर लेकर उनके प्रति प्रेम, गर्व और सम्मान की भावना व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल तस्वीर साझा करना नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश प्रसारित करना है कि बेटियां परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।
इस पहल के माध्यम से लोगों को बेटियों की उपलब्धियों पर गर्व करने, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने तथा उनके सपनों को साकार करने में सहयोग देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का संदेश है कि प्रत्येक बालिका को सम्मानपूर्वक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, स्वस्थ रहने और अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले। बालिकाओं को सशक्त बनाना केवल उनके व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक शिक्षित, समानतापूर्ण और विकसित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



