आशा कार्यकत्रियों का 23 अक्टूबर को लखनऊ में महापड़ाव का ऐलान
सात फरवरी के समझौते को लागू करने व मानदेय 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग

सरेनी, रायबरेली। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आवाह्न पर आशा कार्यकत्रियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को सरेनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. शुभम सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 7 फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री एवं यूनियन पदाधिकारियों के बीच हुए समझौते के बावजूद मांगों का अपेक्षित समाधान नहीं होने पर नाराजगी जताई गई है। संगठन ने मांगों के समाधान के लिए 23 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में महापड़ाव करने का निर्णय लिया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि समझौते के तहत आशा व आशा संगिनियों के मानदेय में बढ़ोतरी, मातृत्व अवकाश,जीवन बीमा राशि दो लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने, स्वास्थ्य बीमा कवर तथा कैशलेस चिकित्सा सुविधा सहित विभिन्न मांगों पर सहमति बनी थी। इसके लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट के बाद भी समझौते को लागू करने की दिशा में अंतिम बैठक आज तक नहीं बुलाई गई।
आशा कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया कि विभिन्न अभियानों में किए गए कार्यों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबे समय से लंबित है। आयुष्मान कार्ड, आयुष्मान गोल्डन कार्ड, सी-बैक, टीवी, स्क्रीनिंग, फाइलेरिया, कुष्ठ रोग, पोलियो, दस्तक व संचारी अभियान समेत कई कार्यों का भुगतान नहीं हुआ है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्ष 2018 से आयुष्मान कार्ड सृजन का भुगतान लंबित है व कोविड-19 के दौरान घोषित एक हजार रुपये प्रतिमाह की राशि भी पूरी तरह नहीं मिली।आभा आईड़ी के सृजन में 1 जनवरी 2023 से योगदान और उसी अनुसार ही भुगतान का आदेश भी जारी किया गया था। किंतु अब भुगतान के समय 2023 के बजाय मात्र 2024 का आधा अधूरा भुगतान किया गया है। दस्तक, संचारी अभियानों में योगदान का इस अभियान के प्रारंभ से आज तक कभी भी कोई भुगतान नहीं हुआ।



