यूपीआईटीएस-2026: 6,500 करोड़ के हुए 4,400 एमओयू

- 41,500 बी2बी बैठकें और 5.99 लाख फुटफॉल के साथ संपन्न हुआ पांच दिवसीय यूपीआईटीएस-2026
- पिछले संस्करण से हर प्रमुख कारोबारी पैमाने पर बढ़ा यूपीआईटीएस, बी2बी बैठकें 31%, एमओयू 13% और संभावित कारोबार 24% बढ़ा
पायनियर समाचार सेवा। ग्रेटर नोएडा
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 का चौथा संस्करण निवेश, कारोबार और वैश्विक भागीदारी के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए मंगलवार को संपन्न हो गया। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक चले इस पांच दिवसीय महाकुंभ ने प्रदेश के उत्पादों, एमएसएमई और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर मजबूत पहचान दिलाई। इस दौरान करीब 680 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 6,500 करोड़ मूल्य के 4,400 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा ट्रेड शो के दौरान मिली बिजनेस इन्क्वायरी के आधार पर करीब 15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का अनुमान आंका गया है।
फेडरेशन आॅफ इंडियन एक्सपोर्ट आॅर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 41,500 बी2बी एवं व्यावसायिक बैठकें दर्ज की गईं। इनमें से 13,500 बैठकें रिवर्स बायर्स-सेलर्स मीट (आरबीएसएम) क्षेत्र में हुईं, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में करीब 28,000 कारोबारी संवाद दर्ज किए गए। इन बैठकों के जरिए देश-विदेश के खरीदारों ने राज्य के उद्यमियों और निमार्ताओं के साथ सीधे दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारियों की रूपरेखा तैयार की। पांच दिनों में ट्रेड शो में कुल 5,98,693 दर्शकों और व्यावसायिक खरीदारों की आमद दर्ज की गई, जिसमें 1,74,990 घरेलू बिजनेस बायर्स और 4,23,703 आम दर्शक शामिल रहे।
सीएम के विजन के अनुरूप आयोजित हो रहा यूपीआईटीएस पिछले तीन संस्करणों की यात्रा की तुलना में इस वर्ष कारोबार और भागीदारी, दोनों पैमानों पर अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक आयोजन साबित हुआ। पिछले वर्ष (2025) की तुलना में हर प्रमुख कारोबारी पैमाने पर भारी उछाल देखने को मिला। वर्ष 2025 में दर्ज 31,650 बी2बी बैठकों की तुलना में इस बार 31.12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह संख्या 41,500 पर पहुंच गई। विदेशी खरीदारों के साथ आरबीएसएम क्षेत्र की बैठकों में 123.1 प्रतिशत की जोरदार छलांग दर्ज की गई, जो 6,050 से बढ़कर 13,500 हो गईं। वहीं मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र की बैठकों में 9.38 प्रतिशत की बढ़त रही। हस्ताक्षरित एमओयू की संख्या 3,900 से 12.82 प्रतिशत बढ़कर 4,400 तक पहुंची। सबसे उल्लेखनीय बढ़त एमओयू के अनुमानित मूल्य में दर्ज की गई, जो 2,680 करोड़ ($425 मिलियन) से 142.54 प्रतिशत उछलकर 6,500 करोड़ ($680 मिलियन) पर पहुंच गया। बिजनेस इन्क्वायरी में भी 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ संभावित कारोबार 12,500 करोड़ से बढ़कर 15,500 करोड़ आंका गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना 'एक जिला, एक व्यंजन (ओडीओसी)' पूरे आयोजन के दौरान विदेशी व घरेलू बायर्स के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रही। प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक शिल्प, हथकरघा, पीतल उत्पाद, कालीन, चमड़ा उद्योग और विशिष्ट कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिली। कुल मिलाकर यह आयोजन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में एक ठोस और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में वन्यजीव व वनस्पति संपदा से जुडे युवा
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के पांचों दिन वन विभाग का आउटलेट युवाओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। अंतिम दिन भी यहां पहुंचे युवा उत्तर प्रदेश की वन्यजीव और वनस्पति संपदा को करीब से जानने में जुटे रहे। मेरठ की छात्रा सुनैना ने कहा कि ट्रेड शो में वन विभाग के आउटलेट पर आकर उसे पहली बार प्रदेश की वन संपदा के बारे में इतनी जानकारी मिली। सोनभद्र, ललितपुर, लखीमपुर और बहराइच में संचालित 22 वन धन केंद्रों के बारे में जानना उसके लिए बिल्कुल नया अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि ट्रेड शो से अपने ही प्रदेश के बारे में बहुत सी ऐसी बातें यहां आकर पता चलीं, जिनकी पहले जानकारी नहीं थी। नोएडा की ओजस्वी ने कहा कि ट्रेड शो में दूसरे आउटलेट जहां कारोबार और उत्पादों की जानकारी दे रहे थे, वहीं वन विभाग के आउटलेट ने उसे प्रकृति से जोड़ा। यहां आकर लगा कि यूपी सिर्फ उद्योगों और बड़े शहरों का प्रदेश नहीं है। यहां वन्यजीवों और पेड़-पौधों की भी इतनी बड़ी दुनिया है। मेरठ के छात्र रवि कुमार ने बताया कि बबूल, सागौन, खैर और अर्जुन जैसे पेड़ उनके आसपास दिखाई देते हैं, लेकिन उनके महत्व और संरक्षण की जानकारी उन्हें यहां आकर मिली। उन्होंने कहा कि रोज दिखाई देने वाले पेड़ों को अब वह अलग नजरिए से देखेंगे। पांच दिन तक चले प्रदर्शन में मेरठ, लखनऊ और प्रयागराज क्षेत्र की वन संपदा को भी अलग-अलग तरीके से सामने रखा गया। युवाओं को बताया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में बबूल, सागौन, खैर और अर्जुन जैसी प्रजातियां प्रमुखता से मिलती हैं, जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में वनस्पतियों की अलग विविधता देखने को मिलती है। इससे युवाओं को प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्रों के साथ वनस्पति विविधता को समझने का अवसर मिला।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: आयुष विभाग को सर्वश्रेष्ठ स्टॉल पुरस्कार मिला
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण में उत्तर प्रदेश आयुष विभाग के स्टॉल को हॉल-4 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन स्टॉल का पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि से आयुष विभाग की गतिविधि, सेवाओं एवं उत्तर प्रदेश में आयुष क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। आयुष विभाग के उप निदेशक डॉ. राम कृपाल ने बताया कि स्टॉल पर आगंतुकों को आयुष चिकित्सा पद्धतियों, सुरक्षित एवं मानकीकृत औषधि निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान व नवाचार, आयुर्वेद, योग एवं पंचकर्म के साथ-साथ आयुर्वेद के वैश्वीकरण की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। उत्तर प्रदेश को वेलनेस टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने व साक्ष्य-आधारित एवं अनुसंधानपरक आयुर्वेदिक उपचार को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया। स्टॉल पर चिकित्सकों द्वारा आगंतुकों की नाड़ी परीक्षा कर स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया गया। साथ ही आयुर्वेदिक आहार-विहार, ऋतुचर्या एवं दिनचर्या के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई।यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: गन्ने की नई उन्नत किस्में बनाएंगी किसानों को समृद्ध
ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की नवीन उन्नत चार किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित किस्मों का उद्देश्य प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना तथा लाल सड़न रोग के प्रभाव को कम करना रहा। ट्रेड शो में को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231 किस्मों को प्रदर्शित किया गया है। इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर है। उन्नत किस्मों में गन्ने के प्रमुख रोग लाल सड़न (रेड रॉट) के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति भी पाई जाती है। इसके साथ ही इनमें अंकुरण और शुरूआती बढ़वार अच्छी होती है। मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या भी अधिक होने से गन्ने की उत्पादकता और चीनी उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। इन किस्मों की एक अन्य खासियत अच्छी पेड़ी क्षमता है। पेड़ी फसल का बेहतर उत्पादन होने से किसानों को अगली फसल तैयार करने में लागत कम करने के साथ अच्छा उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। नवीन उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल सकती है।



