2013 की आपदा में बह गए थे पुल, आज तक नहीं हुआ निर्माण
बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण
पायनियर समाचार सेवा। विकासनगर। जौनसार-बावर क्षेत्र में भारी बारिश के बीच उफनती नदियां और बरसाती नाले ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गए हैं। चकराता तहसील क्षेत्र के नराया गांव सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण अमलावा नदी पर पुल नहीं होने के कारण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। वर्ष 2013 की आपदा में अमलावा नदी पर बने कई पुल बह गए थे, लेकिन 13 साल बाद भी इनका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है।
बरसात के मौसम में अमलावा नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। नदी के दूसरी ओर ग्रामीणों की कृषि भूमि और पशुशालाएं हैं। ऐसे में खेतों और पशुशालाओं तक पहुंचने के लिए उन्हें उफनती नदी पार करनी पड़ती है। कई ग्रामीण नदी पार करने के लिए एक-दूसरे और डंडों का सहारा लेते हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद क्षेत्र में कई बार आई आपदाओं में अमलावा नदी पर बने करीब एक दर्जन पुल और पुलिया क्षतिग्रस्त होकर बह गए। वर्ष 2013 की आपदा के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। इसके बावजूद अब तक सभी स्थानों पर पुलों का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया है। पुल के अभाव का खामियाजा पानुवा, मलेथा, उदपाल्टा, कुरोली, कोठा तारली, सैंज, सैंसा, नराया, चिबऊ, कोटि और कोरूवा समेत कई गांवों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन पूरी तरह जोखिम भरा हो जाता है।
पूर्व प्रधान नराया गांव श्रीचंद तोमर ने बताया कि ग्रामीण कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को पुल निर्माण की समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की भूमि नदी के दूसरी ओर है और बरसात के दिनों में खेतों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि उपजिलाधिकारी कालसी-चकराता को भी समस्या की जानकारी है, लेकिन अभी तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक सलगा, बोहा और नराया गांव के करीब 25 परिवारों की पशुशालाएं, छानियां और कृषि भूमि अमलावा नदी के दूसरी ओर स्थित हैं। इसके अलावा कई अन्य गांवों के लिए नदी पार पैदल मार्ग भी है। पुलिया नहीं होने से ग्रामीणों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्र के ग्रामीण पीताम्बर सिंह, पूरण सिंह तोमर, रतन सिंह तोमर, गोपाल राठौर, राजेंद्र सिंह राय और सुरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि आपदा के वर्षों बाद भी पुलों का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। उन्होंने प्रशासन से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है। एसडीएम कालसी प्रेमलाल ने कहा कि क्षतिग्रस्त और नए पुलों के निर्माण के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
क्षतिग्रस्त और नए पुलों के निर्माण के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -प्रेमलाल, एसडीएम कालसी