उत्तर प्रदेश में पिलियन राइडर्स के लिए हेलमेट नियमों के सख्त प्रवर्तन का टू-व्हीलर हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने किया स्वागत

नई दिल्ली । टू-व्हीलर हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने उत्तर प्रदेश ट्रैफिक विभाग द्वारा दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वाले यात्रियों (पिलियन राइडर्स) के लिए हेलमेट नियमों के प्रवर्तन को और सख्त करने के निर्णय का स्वागत किया है। एसोसिएशन ने इस पहल को राज्य में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और दोपहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों के बीच जिम्मेदार यातायात व्यवहार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।इस पहल का स्वागत करते हुए टू-व्हीलर हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राजीव कपूर ने कहा, “हम उत्तर प्रदेश ट्रैफिक विभाग द्वारा पिलियन राइडर्स के लिए हेलमेट नियमों के प्रवर्तन को मजबूत करने की पहल की सराहना करते हैं। हेलमेट केवल यातायात नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, जो सड़क दुर्घटना की स्थिति में जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
दोपहिया वाहन पर सवार प्रत्येक व्यक्ति—चाहे वह वाहन चला रहा हो या पीछे बैठा हो—को समान स्तर की सुरक्षा मिलनी चाहिए। यह कदम इस संदेश को मजबूत करेगा कि सड़क सुरक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है और हेलमेट पहनना हर दोपहिया यात्री की आदत का हिस्सा होना चाहिए।”एसोसिएशन ने इस अवसर पर नकली, गैर-मानक और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले हेलमेट के निर्माण एवं बिक्री के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। एसोसिएशन का कहना है कि केवल हेलमेट पहनने को अनिवार्य करना पर्याप्त नहीं है; यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि उपभोक्ता को ऐसा हेलमेट मिले जो निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता हो एसोसिएशन के अनुसार, भारत में बाजार में उपलब्ध लगभग 50 प्रतिशत हेलमेट नकली या गैर-मानक हो सकते हैं, जो सड़क सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
ऐसे हेलमेट दुर्घटना के समय अपेक्षित सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं हो सकते और उपभोक्ताओं को सुरक्षा का झूठा भरोसा दे सकते हैं।राजीव कपूर ने कहा, “सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह बेहद जरूरी है कि प्रवर्तन केवल हेलमेट न पहनने वालों तक सीमित न रहे, बल्कि नकली और गैर-मानक हेलमेट के निर्माण एवं बिक्री पर भी समान रूप से सख्त कार्रवाई हो। यदि बाजार में हर दो हेलमेट में से एक हेलमेट नकली या गैर-मानक होने की स्थिति है, तो यह केवल उद्योग से जुड़ा मुद्दा नहीं बल्कि सीधे तौर पर उपभोक्ता सुरक्षा का विषय है।”राजीव कपूर ने कहा, “यदि नकली हेलमेट का उत्पादन स्रोत पर ही रोक दिया जाए, तो ऐसे उत्पादों को बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचने से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए संबंधित विभागों को संदिग्ध निर्माण इकाइयों, आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं की नियमित जांच करनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।”



